ट्रेन में घूरने का वीडियो वायरल: क्या अब पुरुष भी सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित हैं?
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चेन्नई के एक उपनगरीय (सबअर्बन) ट्रेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें एक युवक ने आरोप लगाया है कि ट्रेन में सफर के दौरान एक अन्य व्यक्ति ने उसे करीब 15 से 20 मिनट तक लगातार घूरा, जिससे वह असहज और असुरक्षित महसूस करने लगा। यह घटना 25 जून को अंबत्तूर के पास हुई थी।

रिकॉर्डिंग क्यों शुरू की? युवक के अनुसार, उसने शुरुआत में इस हरकत को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की, लेकिन जब घूरने का सिलसिला लंबा खिंच गया, तो उसने सुरक्षा के लिहाज़ से वीडियो बनाना शुरू किया। फुटेज में सामने बैठा व्यक्ति अजीब भावों के साथ सीधे युवक की ओर देखता हुआ दिखाई दे रहा है। युवक ने अपनी पोस्ट में लिखा, एक लड़के के तौर पर, मुझे बहुत ही असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

सवालात पर चुप्पी और पलायन जब युवक ने हिम्मत जुटाकर उस व्यक्ति से पूछा कि वह उसे क्यों घूर रहा है, तो आरोपी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बजाय, वह अपनी सीट से उठा और चुपचाप दूसरे डिब्बे में चला गया। इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और व्यवहार को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।

महिलाओं के अनुभव से तुलना वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कई महिला यूजर्स ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह उनके लिए रोज़मर्रा की कड़वी सच्चाई है। एक यूजर ने लिखा, हम महिलाएं रोज़ाना पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसे हालातों से गुज़रती हैं। अब समझ आया होगा कि यह कितना अजीब और डरावना होता है।

पुरुषों की सुरक्षा पर छिड़ी बहस यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि उत्पीड़न का शिकार सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी होते हैं। हालांकि, सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से पुरुष अक्सर ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट नहीं करते। कई यूजर्स ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा का मुद्दा किसी जेंडर (लिंग) से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।

क्या अब कानूनों में बदलाव की ज़रूरत है? ऑनलाइन बहसों में लोगों ने सख्त कानूनों की मांग की है। कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए उन लोगों पर निशाना साधा जो अक्सर पीड़ित को ही दोषी ठहराते हैं (Victim Blaming)। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, शायद अब लोग समझें कि समस्या कपड़ों या जेंडर की नहीं, बल्कि उस विकृत मानसिकता की है जो अनजान लोगों को घूरने या परेशान करने का अधिकार समझती है।

यह मामला अब सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते अनचाहे व्यवहार और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ामों को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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