राम मंदिर दान चोरी: क्या अपराधियों पर कार्रवाई से ज्यादा विपक्ष और ओवैसी के नैरेटिव पर मचेगा शोर?
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अयोध्या में दान की चोरी पर सियासत क्यों? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए धन की चोरी ने करोड़ों सनातनियों की आस्था को गहरा आघात पहुँचाया है। इस संगीन मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे जेल में कड़ी पूछताछ की जा रही है। लेकिन इस घटना के बाद विपक्ष और कुछ विशेष वर्ग इसे हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह सच में चिंता है या कोई राजनीतिक एजेंडा ?

ओवैसी का हास्यास्पद सुझाव असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता, जो अक्सर राम जन्मभूमि के फैसले पर सवाल उठाते रहे हैं, अब दान चोरी को लेकर सुधार की बात कर रहे हैं। ओवैसी ने विवादित बयान देते हुए कहा कि अगर ट्रस्ट में मुसलमान होते, तो घपला नहीं होता। ओवैसी का यह तर्क पाखंड से भरा है। देश के विभिन्न वक्फ बोर्डों में हुए अरबों के घोटालों पर चुप्पी साधने वाले आज राम मंदिर पर भाषण दे रहे हैं।

वक्फ संपत्तियों में संगठित लूट का सच वक्फ संपत्तियों का डेटाबेस बताता है कि देशभर में 58,898 से अधिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे हुए हैं। कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक, वक्फ बोर्ड में हुए हजारों करोड़ के घोटालों पर ओवैसी जैसे नेताओं ने कभी कोई मस्जिद में हिंदू सदस्य रखने की मांग नहीं की। यह एक व्यवस्थित लूट है जिसे नजरअंदाज कर, अब मंदिर के बहाने शातिर नैरेटिव सेट किया जा रहा है।

चंपत राय पर क्यों उठ रहे सवाल? जांच की आंच अब राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक भी पहुँच गई है। पुलिस ने उनसे तीन घंटे लंबी पूछताछ की है। सवाल यह है कि चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव को इतनी संवेदनशील जगह पर तैनात क्यों किया गया था और क्यों शिकायतों के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई?

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। हालांकि, उन पर अभी कोई मामला दर्ज नहीं है, लेकिन एक सर्वेसर्वा के रूप में उनकी प्रबंधकीय जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वे अपने करीबियों के भ्रष्टाचार को ढाल दे रहे थे? यह जांच का विषय है।

कानून का डंडा और विपक्ष का अवसरवाद एक तरफ आरोपी सलाखों के पीछे हैं और एसआईटी मामले की तह तक जा रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आप जैसे दल इस मुद्दे को सड़क पर लाकर राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जो लोग कल तक राम के अस्तित्व को नकारते थे, वे आज मंदिर जाने और राजनीति करने के लिए मचल रहे हैं।

स्कंद पुराण के अनुसार, देवता की संपत्ति का हरण करने वाला नरक का भागी होता है। कानून इस महापाप के दोषियों को सजा देने के लिए काम कर रहा है। मगर, इस घटना के आड़ में आस्था पर हमला करने वाले और बाबरी जिंदाबाद का नारा लगाने वाले उन तत्वों का पर्दाफाश करना भी जरूरी है, जो केवल आपदा में अवसर तलाश रहे हैं।

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