अदाणी ग्रुप के केस पर न्यूयॉर्क जज का सवाल: क्या केस खारिज होने में कोई अड़चन है?
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अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर न्यूयॉर्क के फेडरल जज के हालिया फैसले ने चर्चा छेड़ दी है। जज ने अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) से केस खारिज करने से पहले विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई कानूनी खतरा नहीं, बल्कि महज एक प्रक्रियात्मक कदम है।

प्रक्रियात्मक जरूरत है जज का आदेश वरिष्ठ अमेरिकी वकील क्रिस मैन का कहना है कि जज का यह निर्देश कि सरकारी वकील (DoJ) अपना पक्ष स्पष्ट करें, कानून की धारा 48(a) के तहत एक सामान्य प्रक्रिया है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि केस को आगे बढ़ाया जा रहा है। अमेरिका के कानूनी इतिहास में ऐसा कोई आधुनिक उदाहरण नहीं है, जहां किसी जज ने सरकार को उस केस को चलाने के लिए मजबूर किया हो, जिसे अभियोजन पक्ष खुद बंद करना चाहता है।

अदालत का अधिकार सीमित कानूनी जानकारों के मुताबिक, आपराधिक मुकदमों को आगे बढ़ाना या वापस लेना पूरी तरह से एग्जीक्यूटिव ब्रांच यानी सरकार का काम है। अदालतें केवल यह सुनिश्चित करती हैं कि केस खारिज करने की अर्जी नेक नीयत से दी गई है। न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स के केस का उदाहरण देते हुए मैन ने बताया कि वहां भी जज ने स्पष्टीकरण मांगे थे, लेकिन अंत में सरकार के फैसले को ही माना गया।

क्यों खारिज हो सकता है केस? अदाणी की कानूनी टीम ने कोर्ट को जो सबूत और पत्र सौंपे हैं, उनमें कई अहम बिंदु हैं:

निवेशकों को कोई आर्थिक नुकसान नहीं अदाणी ग्रुप के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क यह है कि इस विवाद से किसी भी निवेशक का एक पैसा नहीं डूबा है। सभी बॉन्ड और लोन का भुगतान समय पर किया गया है या किया जा रहा है। 2021 के बॉन्ड पूरी तरह चुका दिए गए हैं और 2024 के बॉन्ड में भी कोई डिफॉल्ट नहीं है।

अगले कुछ हफ्तों में आ सकता है फैसला जज ने DoJ को 13 जुलाई तक का समय दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि DoJ इस डेडलाइन से पहले ही विस्तृत जवाब सौंप देगा, जिसके बाद अदालत बिना किसी लंबी सुनवाई के इस केस को आधिकारिक तौर पर खारिज कर सकती है। कुल मिलाकर, यह मामला अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही इसे बंद कर दिया जाएगा।

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