पुणे के लोहागढ़ किले में हुई केतन अग्रवाल की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 20 साल की सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी द्वारा रची गई इस खौफनाक साजिश ने रिश्तों की पवित्रता पर कई सवाल खड़े किए हैं। इस हाई-प्रोफाइल केस को मात्र 72 घंटों में सुलझाने वाले पुणे ग्रामीण एसपी संदीप सिंह गिल इस वक्त चर्चा के केंद्र में हैं।
कौन हैं रियल सिंघम संदीप सिंह गिल? संदीप सिंह गिल पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले गिल मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में एमए किया और एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू किया था। हालांकि, समाज में बड़े स्तर पर बदलाव लाने की चाहत उन्हें सिविल सेवा की ओर खींच लाई। 2016 बैच के IPS अधिकारी गिल ने अपनी मेहनत से 143वीं रैंक हासिल कर देश सेवा का मार्ग चुना।
प्रोफेसर से पुलिस कप्तान तक का सफर एक शिक्षक की भूमिका से पुलिस वर्दी तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। पुणे शहर में डीसीपी (जोन-1) के पद पर कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के बाद, पिछले साल उन्हें पुणे ग्रामीण का पुलिस अधीक्षक (एसपी) बनाया गया। अपनी शांत कार्यशैली और तकनीकी दक्षता के चलते वे आज सोशल मीडिया पर असली सिंघम कहे जा रहे हैं।
कैसे खुला सिया-चेतन का काला चिट्ठा? 18 जून को केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में एक हादसा माना गया था। लेकिन परिजनों के शक पर एसपी संदीप गिल ने तुरंत जांच टीम गठित की। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स की बारीकी से जांच की, तो सिया और चेतन के झूठ का पुलिंदा खुल गया। तकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन और बातचीत) ने यह साबित कर दिया कि यह हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या थी।
असफलता के बाद भी नहीं माने आरोपी मीडिया से बात करते हुए एसपी संदीप गिल ने बताया कि यह हत्या अचानक नहीं हुई थी। आरोपियों ने 31 मई, 4 जून और 14 जून को भी केतन को मारने की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकाम रहे। अंततः 18 जून को उन्होंने केतन को पहाड़ से धक्का देकर उसकी जान ले ली।
कानूनी प्रक्रिया पर एसपी का जोर अपनी जांच की सफलता पर एसपी गिल ने स्पष्ट किया कि पुलिस केवल कबूलनामे पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा, पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अदालत में मान्य नहीं होता। इसलिए हम स्वतंत्र साक्ष्यों को इकट्ठा कर रहे हैं ताकि दोषियों को उनके किए की सजा मिल सके। केवल 72 घंटों में इस केस की गुत्थी सुलझाकर संदीप गिल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्दी का फर्ज और कानून की नजर से कोई अपराधी बच नहीं सकता।
*Pune, Maharashtra: On the Ketan Agarwal murder case, Sandeep Gill, Superintendent of Police, Pune Rural says, A confession made before the police is not admissible in court. Therefore, we have to independently establish our evidence. We must corroborate the evidence and present… pic.twitter.com/ZRoiRvVqYJ
— IANS (@ians_india) June 25, 2026
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