बाजार में सामान खरीदते वक्त हममें से ज्यादातर लोग पैकेट के सामने लिखे आकर्षक दावों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। 100% नेचुरल , नो एडेड शुगर , हार्ट हेल्दी या ऑर्गेनिक जैसे शब्द देखकर हमें लगता है कि हम अपनी सेहत के लिए सही चुनाव कर रहे हैं। लेकिन, पैकेट के पीछे लिखी सामग्री (Ingredients) पढ़िए, तो कहानी पूरी तरह अलग नजर आती है।
दावों और हकीकत का अंतर
FSSAI ने हाल ही में कई फूड ब्रांड्स को नोटिस थमाए हैं। एक मैंगो जूस पर नो एडेड शुगर लिखा था, लेकिन जांच में 39% गन्ने का रस निकला। एक नूडल्स ब्रांड 100% नेचुरल और ऑर्गेनिक आटा होने का दावा कर रहा था, जबकि अंदर सिर्फ मैदा था। एक कुकिंग ऑयल पर हार्ट प्रो लिखकर ग्राहकों को यह यकीन दिलाया गया कि इससे दिल की सेहत सुधरेगी, जो पूरी तरह भ्रामक है।
100% का मायाजाल
कानूनी तौर पर 100% शब्द की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है। कंपनियां इसका फायदा उठाती हैं। यह कभी साफ नहीं होता कि यह 100% शुद्धता का है, फल का है या नेचुरल होने का। वहीं, बच्चों के पसंदीदा किंडर जॉय पर रिच इन मिल्क सॉलिड्स का दावा किया जाता है, जबकि सामग्री में शुगर और फैट की मात्रा बहुत ज्यादा और दूध का अंश बहुत कम है।
चेतावनी के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
FSSAI ने 28 मई 2025 को एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर 100% शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने को कहा था। इसके बावजूद, एक पड़ताल में सामने आया कि चिन्हित किए गए 160 भ्रामक दावों वाले उत्पादों में से करीब 120 उत्पाद आज भी उन्हीं पुराने दावों के साथ बाजार में बिक रहे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भी माना गया कि भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ नियम तो हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन (Implementation) बेहद कमजोर है।
कंपनियों का तर्क और ग्राहकों की जिम्मेदारी
कंपनियां खुद को बचाने के लिए कहती हैं कि उनके दावे वैज्ञानिक आधार पर सही हैं और वे नियमों का पालन कर रही हैं। हालांकि, FSS एक्ट 2006 के तहत ग्राहक को गुमराह करना दंडनीय अपराध है। उल्लंघन साबित होने पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान है।
निष्कर्ष
नियमों की सख्ती के बीच फिलहाल जिम्मेदारी आपकी है। पैकेट के सामने लिखे बड़े-बड़े विज्ञापनों के बजाय पीछे लिखी कंटेंट लिस्ट जरूर पढ़ें। नेचुरल और प्योर जैसे शब्दों के बहकावे में आने के बजाय सामग्री की बारीकी देखें, क्योंकि आपकी सेहत का फैसला मार्केटिंग नहीं, सामग्री करती है।
FSSAI has issued notices to several food business operators (FBOs) for violating provisions of the FSS Act, 2006 regarding misleading brand names, trade names, and product claims, labelling violations and other consumer complaints.
— FSSAI (@fssaiindia) June 19, 2026
FBOs are directed to take corrective measures. pic.twitter.com/QSb1UNZ3Gm
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