होर्मुज स्ट्रेट में रिकॉर्ड तेल सप्लाई: क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
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वाशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से एक दिन में तेल की रिकॉर्ड सप्लाई हुई है, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।

रिकॉर्ड सप्लाई: क्या कहते हैं आंकड़े?

ट्रंप के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से एक ही दिन में 19 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई की गई है। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। ट्रंप ने इसे उत्साहजनक बताते हुए कहा, तेल की कीमतें लगातार नीचे गिर रही हैं और दुनिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित हो गई है।

इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में पहुंचता है। इस मार्ग पर कोई भी छोटा सा संकट भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र की हर गतिविधि पर तेल कंपनियां और वैश्विक सरकारें बारीक नजर रखती हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?

तेल विशेषज्ञ मानते हैं कि जब आपूर्ति (Supply) बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव कम होता है। यदि 19 मिलियन बैरल का यह स्तर बना रहता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है। इसका सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिल सकता है, क्योंकि कच्चे तेल के दाम कम होने से पेट्रोल और डीजल के दामों में भी राहत की उम्मीद की जा सकती है।

दुनिया अब ज्यादा सुरक्षित : ट्रंप का मतलब क्या है?

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में तेल सप्लाई को वैश्विक सुरक्षा से जोड़ा है। उनका मानना है कि जब होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मार्ग से अबाध व्यापार होता है, तो यह मध्य पूर्व में स्थिरता का संकेत देता है। यदि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो इससे न केवल आर्थिक ढांचा मजबूत होता है, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव भी कम महसूस होता है।

बाजार का रुख: विशेषज्ञों की चेतावनी

हालांकि रिकॉर्ड सप्लाई से राहत की खबर है, लेकिन विशेषज्ञ अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों (OPEC) की रणनीति, वैश्विक मांग और मध्य पूर्व के मौजूदा राजनीतिक हालात।

फिलहाल, निवेश जगत और वैश्विक बाजार इस खबर पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। यदि सप्लाई की यह गति बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में महंगाई और ऊर्जा कीमतों को लेकर अच्छी खबरें सामने आ सकती हैं।

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