शशि थरूर बनाम पवन खेड़ा: मोदी सरकार की तारीफ ने कांग्रेस में फिर बढ़ाई तकरार
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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। जम्मू-कश्मीर के हालात पर सकारात्मक टिप्पणी और मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर थरूर के रुख ने कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर दिया है। पार्टी के भीतर और बाहर उनके बयानों को लेकर मचे बवाल ने एक बार फिर उनके और पार्टी के बीच के तनाव को उजागर कर दिया है।

महा-मानव मोदी के भक्त और कटाक्ष

थरूर पर सबसे तीखा हमला कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने किया है। हाल ही में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मामले में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की सराहना करने पर खेड़ा ने थरूर को महा-मानव मोदी का भक्त करार दिया। खेड़ा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तंज कसते हुए कहा कि थरूर अब वो भी सुनने में सक्षम हैं जो पीएम मोदी ने कहा ही नहीं है।

जम्मू-कश्मीर दौरा: क्या है थरूर का स्टैंड?

हाल ही में विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में थरूर ने जम्मू का दौरा किया। वहां उन्होंने उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद घाटी में शांति और प्रगति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। थरूर का कहना है कि वे वहां केवल पासपोर्ट कार्यालयों और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर अध्ययन करने गए थे, न कि घरेलू राजनीति देखने।

वहीं, कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उन पर निशाना साधा है। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि थरूर को जमीनी हकीकत समझने के लिए स्थानीय लोगों से मिलना चाहिए था।

बीजेपी और अन्य दलों की प्रतिक्रिया

थरूर के इस रुख पर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने इसे विडंबना करार दिया है। वहीं, जदयू के राजीव रंजन ने थरूर को राष्ट्रवादी नेता बताते हुए कहा कि कांग्रेस उनके विकासोन्मुखी नजरिए को पचा नहीं पा रही है। शिवसेना (यूबीटी) के संजय निरुपम ने भी कहा कि थरूर मुद्दों को सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, जबकि कांग्रेस का नजरिया नकारात्मक है।

पार्टी आलाकमान से दूरी और निजी राय

यह पहली बार नहीं है जब थरूर के बयान कांग्रेस के आधिकारिक स्टैंड से अलग दिखे हों। पिछले साल भी ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति के मुद्दों पर थरूर की सराहना को पार्टी ने उनकी निजी राय करार देकर किनारा कर लिया था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आलाकमान के साथ इन मतभेदों को लेकर कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

बचाव में क्या बोले थरूर?

लगातार हो रही आलोचनाओं के बीच थरूर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे मानवीय मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखते। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीयों की सुरक्षा और देश की विदेश नीति पर कूटनीतिक जीत को लेकर वे अपना नजरिया रखने के लिए स्वतंत्र हैं। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व के लिए अनुभवी नेता शशि थरूर का यह स्वतंत्र रुख एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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