अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौता: 14 पॉइंट्स की डील में छिपा है मध्य पूर्व का नया भविष्य
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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म होने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक ऐतिहासिक 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का नाम दिया गया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।

समझौते का मुख्य केंद्र: होर्मुज स्ट्रेट इस डील का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है। समझौते के तहत, अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और संबंधित प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाएगा। बदले में, ईरान वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करेगा। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

परमाणु कार्यक्रम पर लगाम ईरान ने इस दस्तावेज में आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। डील में परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट करने और भविष्य की निगरानी पर बातचीत करने का प्रावधान है। दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और पुनर्निर्माण अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से बड़ी राहत देने का वादा किया है। इस 14 सूत्रीय योजना में ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करना, तेल निर्यात के लिए विशेष छूट देना और करीब 300 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक विकास कार्यक्रम शामिल है। यह ईरान की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की एक बड़ी कोशिश है।

सैन्य अभियानों पर पूर्ण विराम समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि लेबनान समेत सभी सक्रिय सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने कहा कि ओमान जैसे देशों की मध्यस्थता के बाद यह सहमति बनी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता बनी रहेगी, लेकिन समुद्री मार्ग अब सभी के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा।

ट्रंप की कूटनीति और भविष्य की राह पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में हुए इस हस्ताक्षर को डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह समझौता कितना प्रभावी साबित होगा, यह अगले 60 दिनों की वार्ता पर निर्भर करेगा। फिलहाल, मध्य पूर्व में दशकों से चली आ रही दुश्मनी को खत्म करने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम है।

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