ऑपरेशन सिंदूर के हीरो अब डोभाल के सारथी : चीन-पाक की बढ़ेगी बेचैनी
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भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव हुआ है। भारतीय सेना के डिप्टी चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का नया मिलिट्री एडवाइजर (MA) नियुक्त किया गया है। वे सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के नेतृत्व में काम करेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर के मास्टरमाइंड लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चर्चा में आया था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने जवाबी कार्रवाई की, तो तत्कालीन DGMO (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के रूप में उन्होंने पाकिस्तान के एयरबेस और आतंकी ठिकानों को तबाह करने की रणनीति तैयार की थी। घई ने ही पाकिस्तान के साथ सीजफायर वार्ता का नेतृत्व किया था और भारत की शर्तों पर सहमति बनाई थी।

पहली बार सेवारत अधिकारी की नियुक्ति यह पहली बार है जब किसी सेवारत (Serving) सैन्य अधिकारी को इस अत्यंत महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आमतौर पर इस पद पर सेवानिवृत्त या रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके अधिकारियों को नियुक्त किया जाता रहा है। घई का कार्यकाल दिसंबर 2027 तक है, जो दर्शाता है कि सरकार उन्हें सुरक्षा तंत्र के अगले बड़े फैसलों में सक्रिय भूमिका में देखना चाहती है।

चीन और पाकिस्तान पर पैनी नजर कुमाऊं रेजिमेंट से आने वाले लेफ्टिनेंट जनरल घई का अनुभव व्यापक है। वे अरुणाचल प्रदेश में 56वीं इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाल चुके हैं और उन्हें चीन सीमा का गहरा ज्ञान है। साथ ही, वे श्रीनगर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 15 कोर के कमांडर भी रह चुके हैं, जिससे उन्हें पाकिस्तान की हर हरकत का बारीकी से अंदाजा है।

क्यों अहम है यह नियुक्ति? राष्ट्रीय सुरक्षा के जानकारों का मानना है कि घई की नियुक्ति से एनएसए अजित डोभाल की टीम और मजबूत होगी। जटिल वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के दौर में, एक ऐसे अधिकारी का होना जो हाल ही में सीधे मिलिट्री ऑपरेशंस से जुड़ा रहा हो, भारत को अधिक आक्रामक और सटीक सैन्य निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।

यह नियुक्ति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में भारत अपनी सीमाओं पर चीन और पाकिस्तान की किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए और अधिक तत्पर रहेगा।

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