भवानी भवन में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ: एयरपोर्ट पर लगे सिग्नेचर चोर के नारे, क्या थमेगा सियासी तूफान?
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन बेहद हलचल भरा रहा। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी आखिरकार भारी नाटकीय घटनाक्रम के बीच कोलकाता के अलीपुर स्थित सीआईडी (CID) मुख्यालय भवानी भवन पहुंच गए हैं। पिछले तीन समन को टालने के बाद, कलकत्ता हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर उन्हें शाम 6 बजे से पहले पेश होना था, और वे शाम 5 बजकर 50 मिनट पर वहां दाखिल हुए।

एयरपोर्ट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

भवानी भवन पहुंचने से पहले कोलकाता एयरपोर्ट पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दिल्ली से लौटते ही जैसे ही अभिषेक बनर्जी बाहर निकले, प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। वहां सिग्नेचर चोर, सिग्नेचर चोर के नारों से माहौल गूंज उठा। सुरक्षा घेरे के बावजूद भीड़ ने उनके साथ धक्कामुक्की की। किसी तरह सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित गाड़ी तक पहुंचाया, जहां से वे अपने आवास होते हुए सीधे सीआईडी दफ्तर पहुंचे।

क्या आज हो सकती है गिरफ्तारी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सीआईडी अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तार करेगी? कानूनी जानकारों के अनुसार, कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। अदालत ने सीआईडी को निर्देश दिया है कि जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। फिलहाल, उनकी गिरफ्तारी की संभावना कम है, लेकिन सीआईडी के तीखे सवालों से बच निकलना उनके लिए आसान नहीं होगा।

क्या है सिग्नेचर फ्रॉड का मामला?

यह विवाद टीएमसी के भीतर ही शुरू हुआ। पार्टी के दो विधायकों, रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने स्पीकर से शिकायत की थी कि अभिषेक बनर्जी द्वारा सौंपे गए एक पत्र में 12 विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। यह पत्र शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने के समर्थन में 70 विधायकों की सहमति दिखाने के लिए दिया गया था। सीआईडी ने अब तक 13 विधायकों के बयान दर्ज किए हैं, जिन्होंने इन हस्ताक्षरों को जाली बताया है।

पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष

यह मामला टीएमसी में जारी अंदरूनी बगावत की बानगी भर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के 58 से अधिक विधायक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ मुखर हो चुके हैं। टीएमसी दो स्पष्ट धड़ों में बंटती दिख रही है। भले ही कोर्ट ने अभिषेक को कानूनी सुरक्षा दी हो, लेकिन अपनी ही पार्टी और जनता के बीच बन चुकी यह छवि उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। भवानी भवन की यह पूछताछ आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।

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