पीओके में खूनी खेल पर भारत सख्त: पाकिस्तान को उसके अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए
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पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसा और पुलिस की बर्बरता ने एक भयावह रूप ले लिया है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़प में 27 से अधिक लोगों की जान चली गई है, जबकि 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस अमानवीय घटना के बाद भारत ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अपनी विफलताओं पर पर्दा डाल रहा पाकिस्तान: भारत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वहां से लगातार फर्जी खबरों और भ्रामक वीडियो का सिलसिला चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अपनी नाकामियों को छुपाने और मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन से दुनिया का ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशापूर्ण प्रयास है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह पाकिस्तान को उसके इन कुकर्मों के लिए जवाबदेह ठहराए।

क्यों सुलग रहा है पीओके?

पीओके की जनता शहबाज शरीफ की कठपुतली सरकार के खिलाफ पिछले काफी समय से सड़कों पर है। विरोध का मुख्य कारण बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण है। पाकिस्तानी हुक्मरान इन जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर दमनकारी कार्रवाई कर रहे हैं। विरोध को कुचलने के लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को ही आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।

इंटरनेट बंदी और पुलिस का विद्रोह

प्रशासन ने विरोध की आवाज को दबाने के लिए 9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च से पहले ही पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दीं। हालात इतने गंभीर हैं कि अब पाक पुलिस के जवान भी वहां तैनाती लेने से कतरा रहे हैं। सामने आए सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, कई पुलिसकर्मी पीओके और गिलगित में ड्यूटी ज्वाइन करने से इनकार कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि दमनकारी नीतियों के खिलाफ अब अंदरूनी असंतोष भी चरम पर है।

मानवाधिकार आयोग की चिंता

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। आयोग ने नागरिकों की मौत और संचार सेवाएं बंद करने की कड़ी निंदा की है। HRCP का कहना है कि जब तक पीओके के लोगों को उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जाएगा, तब तक कोई भी संवाद सार्थक नहीं होगा। आयोग ने सरकार से अपील की है कि वे बल प्रयोग बंद करें और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करें।

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