अंपायर्स कॉल: खेल का सबसे पेचीदा नियम, जिसे लेकर दशकों से जारी है घमासान
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क्रिकेट को जेंटलमैन गेम कहा जाता है, लेकिन इसके नियम कई बार विवादों को जन्म देते हैं। इन्ही में से एक है अंपायर्स कॉल (Umpire s Call)। यह क्रिकेट का वह नियम है जो फैंस से लेकर दिग्गजों तक, हर किसी को दो गुटों में बांट देता है।

क्या है अंपायर्स कॉल ? यह नियम डीआरएस (DRS) का एक अभिन्न हिस्सा है। इसका सरल मतलब है कि जब तकनीक (बॉल-ट्रैकिंग) यह स्पष्ट नहीं कर पाती कि गेंद पूरी तरह स्टंप्स पर लग रही है या नहीं, तो मैदान पर मौजूद अंपायर के मूल फैसले को ही अंतिम माना जाता है। यानी तकनीक अगर निर्णायक नहीं है, तो अंपायर की राय को ही सर्वोपरि रखा जाता है।

क्यों मचा है इस पर बवाल? विवाद की जड़ है LBW के फैसले। जब गेंद स्टंप्स के बिल्कुल किनारों को छूती है (जिसे पार्शियल हिट कहते हैं), तब अंपायर्स कॉल लागू होता है। अगर अंपायर ने पहले से आउट दिया है, तो वह आउट ही रहता है। यदि नॉट आउट दिया है, तो वह नॉट आउट ही रहता है। आलोचकों का तर्क है कि जब तकनीक उपलब्ध है, तो मानवीय भूल की गुंजाइश क्यों छोड़ी जाए?

ऐसे काम करता है यह सिस्टम इसे एक उदाहरण से समझिए: अगर अंपायर ने बल्लेबाज को आउट दिया और बल्लेबाज डीआरएस लेता है, तो बॉल-ट्रैकिंग में अगर गेंद केवल स्टंप के थोड़े से हिस्से को छूती दिखती है, तो अंपायर्स कॉल के तहत बल्लेबाज को पवेलियन लौटना होगा। ठीक इसके विपरीत, अगर अंपायर ने नॉट आउट दिया होता, तो वही गेंद बल्लेबाज को जीवनदान दिला देती।

इतिहास और सफर इंटरनेशनल क्रिकेट में डीआरएस के साथ 2009 में अंपायर्स कॉल की शुरुआत हुई। भारतीय क्रिकेट में इसे 1 अक्टूबर 2016 को लागू किया गया। भारत में इस नियम का पहला अनुभव नवंबर 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट टेस्ट में हुआ था, जब हसीब हमीद को आर अश्विन की गेंद पर अंपायर्स कॉल के चलते आउट करार दिया गया था।

बदलाव की मांग और भविष्य बेन स्टोक्स जैसे कई दिग्गज खिलाड़ी सार्वजनिक रूप से इस नियम पर सवाल उठा चुके हैं। क्रिकेट जगत का एक हिस्सा मानता है कि अंपायर्स कॉल खेल में मानवीय निर्णय की अहमियत बनाए रखता है, जबकि दूसरा खेमा इसे तकनीक का अपमान मानता है।

फिलहाल, आईसीसी (ICC) ने इस नियम में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। जब तक यह नियम बरकरार है, तब तक क्रिकेट के मैदान पर होने वाले करीबी फैसलों पर बहस जारी रहेगी और फैंस इसे लेकर अपनी नाराजगी या समर्थन जताते रहेंगे।

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