ममता का डैमेज कंट्रोल : 5 साल बाद 10 जनपथ की दहलीज पर, क्या सोनिया गांधी बचा पाएंगी टीएमसी का किला?
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति और दिल्ली के सत्ता गलियारों में इस समय हलचल तेज है। 2026 के चुनावों में बंगाल में टीएमसी की हार और लोकसभा में 20 सांसदों की बगावत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं। डैमेज कंट्रोल में जुटीं ममता अब सीधे कांग्रेस की शरण में हैं।

5 साल बाद सक्रिय हुई 10 जनपथ की राह सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में शिरकत करने के बाद, मंगलवार को ममता बनर्जी सीधे सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास 10 जनपथ पहुंच गईं। यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि पूरे 5 साल बाद ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी के घर की दहलीज पार की है। पिछली बार जुलाई 2021 में दोनों की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद रिश्तों में आई कड़वाहट के चलते ममता ने वहां जाने से साफ इनकार कर दिया था।

बगावत का दंश और शुभेंदु का ऑपरेशन लोटस टीएमसी के लिए हालात बेहद कठिन हैं। बंगाल की सत्ता हाथ से फिसलने के बाद अब दिल्ली में पार्टी दो-फाड़ होने की कगार पर है। टीएमसी के 20 बागी सांसद दलबदल कानून से बचने के लिए अलग गुट बनाने की फिराक में हैं। वहीं, शुभेंदु अधिकारी की सक्रियता ने ममता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शताब्दी रॉय और डॉ. काकोली घोष दस्तिदार जैसे दिग्गज नेताओं का पाला बदलना ममता के लिए किसी झटके से कम नहीं है।

मुलाकात के 3 बड़े सियासी संदेश राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर हुई यह दूसरी मुलाकात साधारण नहीं है:

  1. सांसदों की टूट पर लगाम: ममता जानती हैं कि बागी सांसदों को रोकने के लिए कांग्रेस का हस्तक्षेप जरूरी है। वे सोनिया गांधी के जरिए उन विपक्षी ताकतों पर दबाव बनाना चाहती हैं जो पर्दे के पीछे से इस बगावत को शह दे रहे हैं।
  2. संसद में सुरक्षा कवच: आगामी मानसून सत्र में अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाने के लिए ममता अब कांग्रेस के सामने पूरी तरह झुकने के लिए तैयार हैं। वह विपक्षी खेमे से मजबूत संरक्षण की उम्मीद कर रही हैं।
  3. गांधी परिवार पर पूर्ण भरोसा: कल तक राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाली ममता अब सोनिया गांधी के रसूख को अपनी डूबती नैया का एकमात्र सहारा मान रही हैं।

क्या टल पाएगी टीएमसी की महाटूट? विशेषज्ञों का मानना है कि ममता का यह कदम महज एक राजनीतिक रणनीति है। अगर टीएमसी के 20 सांसद अलग गुट बना लेते हैं, तो चुनाव आयोग में पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा और चुनाव चिह्न दोनों खतरे में पड़ जाएंगे। 10 जनपथ से निकलते समय ममता के चेहरे पर तनाव साफ था, हालांकि उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सोनिया गांधी का सुरक्षा कवच शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुने गए इस चक्रव्यूह को तोड़ पाएगा, या टीएमसी का बिखरना तय है।

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