सशक्त होती नारी, बदलता भारत: मोदी सरकार के 12 वर्षों में महिलाओं पर रहा विशेष फोकस
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2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। पिछले 12 वर्षों में सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को सुरक्षित, सम्मानजनक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है।

स्वच्छता और गरिमा से शुरू हुआ बदलाव

इस बदलाव की नींव 2014 के स्वतंत्रता दिवस भाषण से पड़ी, जहां प्रधानमंत्री ने महिला गरिमा और स्वच्छता पर जोर दिया। स्वच्छ भारत मिशन एक बड़े जन-आंदोलन के रूप में उभरा, जिसके तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बने। इसने न केवल ग्रामीण महिलाओं को खुले में शौच की मजबूरी से मुक्ति दिलाई, बल्कि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा में भी क्रांतिकारी सुधार किया।

उज्ज्वला और जल जीवन मिशन: रोजमर्रा की चुनौतियों का अंत

जल जीवन मिशन के माध्यम से लाखों घरों तक नल से जल पहुँचा, जिससे महिलाओं को मीलों दूर से पानी ढोने की दैनिक मशक्कत से आजादी मिली। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देकर उन्हें धुएं से होने वाली बीमारियों से बचाया गया। इन दोनों पहलों ने महिलाओं के कीमती समय की बचत की, जिसे उन्होंने शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों में लगाया।

सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों को कानूनी ढाल

सरकार ने तीन तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर मुस्लिम महिलाओं को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए 70 प्रतिशत से अधिक घर महिलाओं के नाम या संयुक्त नाम पर दर्ज हैं। इससे परिवारों में उनके निर्णय की अहमियत बढ़ी और उन्हें आर्थिक मालिकाना हक मिला।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बदलती सोच

इस अभियान ने समाज की सोच में जमीन-आसमान का अंतर पैदा किया है। इसका परिणाम लिंगानुपात में सुधार के रूप में दिख रहा है, जो 2014-15 के 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 75.51% से बढ़कर 80.2% तक पहुँच गया है।

लाभार्थी से उद्यमी बनने का सफर

सरकार ने महिलाओं के लिए एक मजबूत आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है। पीएम मुद्रा योजना के 70% और स्टैंडअप इंडिया के 75% लाभार्थी महिलाएं हैं। 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 10 करोड़ महिलाएं वित्तीय अनुशासन का उदाहरण बन रही हैं। लखपति दीदी योजना ने इस दिशा में एक नई क्रांति ला दी है, जहाँ 1 करोड़ से अधिक महिलाएं सालाना 1 लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं।

नीति निर्माण में नारी शक्ति की भागीदारी

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित कर महिलाओं को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में शामिल किया गया है। स्थानीय निकायों में भी 14 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि सक्रिय हैं। विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में भी महिलाएं नई ऊंचाइयां छू रही हैं—पीएचडी में महिला शोधार्थियों की संख्या में 135% की अभूतपूर्व वृद्धि इसका प्रमाण है।

संकट के समय संबल और सुरक्षा

मिशन शक्ति के तहत वन स्टॉप सेंटर और 24x7 महिला हेल्पलाइन ने संकटग्रस्त महिलाओं को तुरंत न्याय और सहायता का भरोसा दिया है। इसके साथ ही, शक्ति सदन और सखी निवास जैसी योजनाएं उन महिलाओं को सुरक्षा प्रदान कर रही हैं, जो कठिन परिस्थितियों से गुजर रही हैं या काम की तलाश में शहरों का रुख कर रही हैं।

पिछले 12 वर्षों में, इन नीतियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहीं, बल्कि वे देश की अर्थव्यवस्था की संचालक और नेतृत्वकर्ता बन चुकी हैं।

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