MSCI EM इंडेक्स: 26 साल में पहली बार टॉप-10 से बाहर हुआ भारत, क्या है बाजार की घबराहट की वजह?
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भारतीय शेयर बाजार के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। MSCI इमर्जिंग मार्केट्स (EM) इंडेक्स में भारतीय कंपनियों का दबदबा खत्म हो गया है। पिछले 26 वर्षों में यह पहली बार है जब इस इंडेक्स के टॉप-10 शेयरों की सूची में भारत की एक भी कंपनी जगह नहीं बना पाई है।

दिग्गज कंपनियां हुईं बाहर कभी इस लिस्ट की शोभा बढ़ाने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक अब टॉप-10 से बाहर हो चुकी हैं। मार्च 2026 में रिलायंस आठवें और एचडीएफसी बैंक सातवें स्थान पर थे, लेकिन ताजा आंकड़ों में ये क्रमशः 11वें और 12वें स्थान पर खिसक गए हैं।

टॉप-10 पर किनका है कब्जा? इंडेक्स की टॉप लिस्ट पर फिलहाल ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन की टेक कंपनियों का राज है। ताइवान की TSMC करीब 15 फीसदी वेटेज के साथ शीर्ष पर है। इसके अलावा सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, SK ह्यूनिक्स, टेनसेंट और अलीबाबा जैसी कंपनियां टॉप में बनी हुई हैं।

AI और सेमीकंडक्टर की आंधी भारत की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर का उभार है। इन क्षेत्रों से जुड़ी विदेशी कंपनियों के शेयरों में आई जबरदस्त तेजी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसका सीधा असर भारतीय शेयरों के वेटेज पर पड़ा है।

इंडेक्स का महत्व क्यों है? MSCI EM इंडेक्स दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बेंचमार्क में से एक है। ग्लोबल पैसिव फंड और ETF इसी को फॉलो करते हैं। करीब 700 अरब डॉलर से अधिक का निवेश इसी इंडेक्स को आधार मानकर किया जाता है। ऐसे में टॉप-10 से बाहर होने का मतलब है कि बड़े विदेशी निवेशकों की प्राथमिकता में भारतीय कंपनियों का वेटेज अब कम हो गया है।

भारत का घटता वेटेज और भविष्य वर्तमान में MSCI EM इंडेक्स में भारत का कुल वेटेज घटकर 10.87 फीसदी पर आ गया है। इसके विपरीत ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन का संयुक्त दबदबा करीब 70 फीसदी तक पहुंच चुका है।

हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि यह भारत के लिए कोई अंत नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मजबूत है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि में देश की आर्थिक विकास दर और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के दम पर भारत फिर से वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सक्षम है।

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