जोजिला टनल: दुश्मनों की छाती पर ब्रेकथ्रू , 27 साल पुरानी साजिश का भारत ने दिया कड़ा जवाब
News Image

इतिहास रचने वाला ब्रेकथ्रू 9 जून 2026 भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल के दो हिस्सों को जोड़कर एक ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू को अंजाम दिया गया है। यह दुनिया की सबसे लंबी सिंगल ट्यूब बाई-डायरेक्शनल टनल बन गई है, जो लद्दाख की सूरत बदलने की तैयारी में है।

साढ़े तीन घंटे का सफर अब सिर्फ 15 मिनट में अब तक लद्दाख जाने के लिए यात्रियों को खतरनाक जोजिला दर्रे से गुजरना पड़ता था, जहां भारी बर्फबारी और एवलांच के कारण रास्ता अक्सर बंद हो जाता है। शीतकाल में लद्दाख का शेष भारत से संपर्क कट जाता था, जिससे राशन और दवाइयों का संकट पैदा होता था। इस टनल के बनने से 3.5 घंटे का जोखिम भरा सफर महज 15 मिनट की सुगम यात्रा में बदल जाएगा।

दुश्मनों की नापाक कोशिशों को मात 1999 के करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने इसी हाईवे को निशाना बनाकर लद्दाख को भारत से काटने की साजिश रची थी। वह हमेशा से चाहता था कि लद्दाख तक भारतीय सेना की रसद न पहुंचे। अब जोजिला टनल के जरिए भारत ने एक ऐसा ऑल वेदर विकल्प तैयार कर लिया है, जो युद्ध जैसी स्थितियों में भी दुश्मन की हर चाल को नाकाम कर देगा। रणनीतिक रूप से यह टनल चीन और पाकिस्तान, दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

सेना की बढ़ेगी ताकत यह टनल केवल आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के लिए भी गेम चेंजर है। श्रीनगर-लेह हाईवे के जरिए ही सियाचिन ग्लेशियर और एलएसी (LAC) पर तैनात जवानों तक सैन्य सामग्री पहुंचती है। 6,500 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह टनल सुनिश्चित करेगी कि सीमा पर तैनात जवानों को साल के 365 दिन रसद और हथियारों की आपूर्ति मिलती रहे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? परियोजना के अथॉरिटी इंजीनियर युसूफ ने बताया कि प्रोजेक्ट का लगभग 80% काम पूरा हो चुका है। हालांकि टनल को आम ट्रैफिक के लिए पूरी तरह खुलने में करीब दो साल का समय और लगेगा, लेकिन आपातकालीन स्थितियों में भारतीय सेना जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल कर सकती है।

चीन बॉर्डर पर भारत का बढ़ता दबदबा जोजिला टनल उन 31 रणनीतिक टनल प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। 2020 की गलवान घटना के बाद से भारत ने सीमा पर कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ये प्रोजेक्ट न केवल हिमालयी क्षेत्रों में भारत की সামরিক उपस्थिति को मजबूत करेंगे, बल्कि अमरनाथ यात्रा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेंगे।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

‘बड़ा पार्सल तो 20 रुपए एक्स्ट्रा!’ डिलीवरी बॉय की अवैध वसूली का वीडियो वायरल, भड़के लोग

Story 1

टीएमसी में मची बगावत, उद्धव गुट ने साधा निशाना: कहा- जहाज डूबते ही चूहे भागने लगे

Story 1

वीरता का भावुक पल: जब शहीद की मां के आंसुओं ने याद दिलाई आजादी की असली कीमत

Story 1

स्त्री 2 के बाद श्रद्धा कपूर का नया धमाका: ईथा की रिलीज डेट का हुआ ऐलान

Story 1

MSCI EM इंडेक्स: 26 साल में पहली बार टॉप-10 से बाहर हुआ भारत, क्या है बाजार की घबराहट की वजह?

Story 1

20 रुपये दो वरना पार्सल वापस ले जाऊंगा! डिलीवरी ब्वॉय की मनमानी का वीडियो वायरल

Story 1

ऑपरेशन सिंदूर: जब सुखोई की गर्जना से दहला PoK, वीर चक्र से सम्मानित हुए स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक

Story 1

यमुना को फिर मिलेगी नई जिंदगी : 14 जून को दिल्ली सड़क पर उतरेगी, आप भी बनें सफाई महाभियान का हिस्सा

Story 1

ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी बगावत: सोनिया के साथ बैठक के बीच 12 सांसदों ने किया खेला

Story 1

ममता का डैमेज कंट्रोल : 5 साल बाद 10 जनपथ की दहलीज पर, क्या सोनिया गांधी बचा पाएंगी टीएमसी का किला?