भगोड़े और गद्दार : TMC की अंदरूनी जंग में कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों को दी खुली चुनौती
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची खींचतान अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने बागी गुट को गद्दार और भगोड़ा करार देते हुए उन पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।

सत्ता के लालची हैं बागी: कल्याण बनर्जी कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ये लोग सत्ता और सुविधाओं के बिना नहीं रह सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हें केवल बंगला, गाड़ी और सरकारी सुरक्षा चाहिए। बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बीजेपी के पास भले ही ईडी, सीबीआई और राज्यसत्ता हो, लेकिन टीएमसी के पास मां, माटी और मानुष का समर्थन और जनता का अटूट साथ है।

चुनाव से पहले क्यों नहीं थी दिक्कत? कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों से सीधा सवाल पूछा कि चुनाव जीतने के लिए मां, माटी और मानुष का नाम लेने वाले इन नेताओं को जीत के बाद ही परेशानियां क्यों याद आईं? आजाद ने सुखेंदु शेखर रॉय का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी राजनीतिक नैतिकता बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।

ममता बनर्जी नहीं, अब मोदी हैं इनके नेता कीर्ति आजाद ने बागी गुट के बीजेपी नेताओं से मेल-मिलाप पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि भले ही लोकसभा स्पीकर को कोई आधिकारिक चिट्ठी न मिली हो, लेकिन बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव के घर पर बागी सांसदों का जाना यह साबित करता है कि अब ममता बनर्जी उनकी नेता नहीं रहीं, बल्कि उनका नेतृत्व अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।

व्हिप को लेकर काकोली घोष पर निशाना सांसद काकोली घोष के बयानों को लेकर भी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि यदि काकोली घोष ने पार्टी पदों से इस्तीफा देने की बात कही है, तो वह व्हिप कैसे जारी रख सकती हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि व्हिप पार्टी तय करती है और बागी सांसदों की गतिविधियां पूरी तरह से पार्टी विरोधी हैं।

कानूनी दांव-पेच और विलय की चेतावनी अंत में, कल्याण बनर्जी ने संवैधानिक स्थिति साफ करते हुए बागी गुट को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि दलबदल कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अयोग्यता से बचने का एक ही तरीका है—पार्टी का बीजेपी में पूरी तरह विलय करना। टीएमसी नेताओं का यह आक्रामक रुख बताता है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर का यह घमासान और तेज होने वाला है।

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