शताब्दी रॉय का ममता बनर्जी से मोहभंग: दीदी अब बदल चुकी हैं, पार्टी में घुटन हो रही है
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और बीरभूम से चार बार की सांसद शताब्दी रॉय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शताब्दी का कहना है कि ममता अब वैसी नहीं रहीं, जिनसे वे पहली बार मिली थीं।

काम नहीं करने दिया जा रहा शताब्दी रॉय ने एक इंटरव्यू में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी के अंदर एक ऐसा घेरा बन गया है जो जमीनी स्तर के नेताओं की बात नेतृत्व तक पहुंचने ही नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कोई सलाह-मशवरा नहीं होता और मनमानी चल रही है। शताब्दी के अनुसार, अपने संसदीय क्षेत्र के लिए काम करना मुश्किल हो गया है।

कौन हैं शताब्दी रॉय? राजनीति में आने से पहले शताब्दी रॉय बंगाली सिनेमा का एक बड़ा चेहरा थीं। 80 और 90 के दशक में उन्होंने फिल्मी पर्दे पर राज किया। 2009 में राजनीति में कदम रखने के बाद वे लगातार बीरभूम से सांसद चुनी जा रही हैं।

उनकी जाति को लेकर अक्सर चर्चाएं होती हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कभी इसका खुलासा नहीं किया है। फिर भी, कई मीडिया रिपोर्ट्स उन्हें रविदास (दलित) समुदाय से जोड़ती हैं।

निजी जीवन और करियर शताब्दी का जन्म पश्चिम बंगाल के अगरपारा में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय के जोगमाया देवी कॉलेज से पूरी की। वे शताब्दी फाउंडेशन के जरिए एक्टिंग कोर्स भी चलाती हैं। उनके पति मृगांक बनर्जी इस फाउंडेशन के मैनेजर हैं और इस दंपत्ति के दो बच्चे हैं—बेटे सम्योराज बनर्जी और बेटी समियाना बनर्जी।

पार्टी में गद्दार बनाम बागी की जंग शताब्दी रॉय जैसे नेताओं के तेवर देख ममता के वफादार खेमे में खलबली है। TMC नेता कीर्ति आजाद ने बगावत करने वाले नेताओं को गद्दार करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव जीतने के लिए मां, माटी और मानुष का सहारा लेने वाले लोग अब परेशानियां क्यों गिना रहे हैं?

कीर्ति आजाद ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इन नेताओं में थोड़ी भी राजनीतिक नैतिकता बची है, तो इन्हें इस्तीफा देकर नए सिरे से चुनाव लड़ना चाहिए। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह विद्रोह पार्टी का अंत है या केवल एक चुनावी रणनीति?

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