ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत: टीएमसी सांसदों की खुली चुनौती, नरेंद्र मोदी को चुना अपना नेता
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बड़े राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत अब खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद, अब लोकसभा सांसदों ने भी मोर्चा खोल दिया है। बागी गुट द्वारा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात और एनडीए को समर्थन देने की खबरों ने सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

ममता नहीं, अब मोदी हमारे नेता टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा, जिस क्षण इन बागियों ने भूपेंद्र यादव के आवास पर कदम रखा, उन्होंने अपना पाला बदल लिया। अब उनका नेतृत्व ममता बनर्जी के बजाय नरेंद्र मोदी के हाथों में है। कल्याण बनर्जी ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर भाजपा के पास ईडी और सीबीआई जैसी ताकतें हो सकती हैं, लेकिन उनके साथ मां, माटी और मानुष का समर्थन है।

आरजी कर विवाद पर बागियों की चुप्पी पर सवाल कल्याण बनर्जी ने विशेष रूप से शर्मीला सरकार और काकोली घोष दस्तीदार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरजी कर अस्पताल विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि जब पार्टी और कार्यकर्ता संकट में थे, तब ये नेता कहां थे? उन्होंने डॉक्टर शर्मीला सरकार पर तंज कसते हुए पूछा कि उस गंभीर घटना पर उन्होंने एक शब्द भी क्यों नहीं बोला? बनर्जी ने इसे नैतिक पतन करार दिया है।

इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने का चैलेंज टीएमसी नेतृत्व ने बागियों को गद्दार करार देते हुए खुली चुनौती दी है। पार्टी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि जो नेता मां, माटी, मानुष के नाम पर जीते, वे अब अपनी निष्ठा बदल चुके हैं। टीएमसी की मांग है कि अगर इन सांसदों में थोड़ी भी राजनीतिक नैतिकता बची है, तो वे अपने पदों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़कर जनता का जनादेश हासिल करें।

TMC में टूटने का सिलसिला पार्टी में टूट का दायरा बड़ा होता जा रहा है:

दल-बदल कानून से बचने के लिए बागियों को दो-तिहाई बहुमत (19 सांसद) की जरूरत है, जिसे लेकर संसद से सड़क तक जद्दोजहद जारी है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का गुट इस संकट से निपटने के लिए कानूनी और राजनीतिक रणनीति बनाने में जुट गया है।

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