अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अदालती मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। बोस्टन की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा आवेदकों पर थोपी गई 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है।
कोर्ट का फैसला: यह टैक्स है, जुर्माना नहीं जज लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि H-1B वीजा के लिए इतनी बड़ी राशि वसूलना प्रशासनिक शुल्क नहीं, बल्कि एक टैक्स है। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति के पास कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसा कोई टैक्स लागू करने का अधिकार नहीं है। जज ने इसे अमेरिकी विदेश विभाग और आव्रजन सेवा (USCIS) के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
पब्लिक सेक्टर के लिए हानिकारक नीति अदालत ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला न केवल मनमाना है, बल्कि अमेरिकी स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण पब्लिक सेक्टर्स के लिए भी नुकसानदेह है। इस नीति के लागू होने से स्किल्ड प्रोफेशनल्स का अमेरिका में काम करना बेहद कठिन हो गया था, जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी जीत यह फैसला भारत के लिए बेहद राहत भरा है। अमेरिका में जारी होने वाले कुल H-1B वीजा में से 70% से अधिक भारतीय पेशेवरों को मिलते हैं। आईटी, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रतिभा का दबदबा है। 1 लाख डॉलर की भारी फीस का सीधा असर भारतीय टेक प्रोफेशनल्स की जेब पर पड़ रहा था।
ट्रंप प्रशासन करेगा अपील फैसले के बाद व्हाइट हाउस ने हार नहीं मानी है। प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि उच्च अदालत में यह आदेश पलट दिया जाएगा। हालांकि, तब तक के लिए आवेदकों को बड़ी राहत मिल गई है।
क्या है H-1B वीजा प्रोग्राम? यह एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को तकनीकी रूप से कुशल विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इस प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि उच्च शिक्षा प्राप्त प्रोफेशनल्स के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है।
A federal judge has voided President Donald Trump’s requirement of a $100,000 application fee for H-1B visas, ruling that he lacked authority to impose the new policy for a program used by companies to hire highly skilled foreign workers in specialized fields.… pic.twitter.com/JunAO1wbyq
— CNN (@CNN) June 8, 2026
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