संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा प्रहार: फितना अल हिंदुस्तान के नाम पर पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश
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न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को उसकी हकीकत का आईना दिखाया है। अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के दौरान, भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार और उसके दोहरे मापदंडों की कड़ी आलोचना की।

झूठ का नया नाम: फितना अल हिंदुस्तान भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपने देश में सक्रिय आतंकी समूहों को फितना अल हिंदुस्तान का नाम देकर भारत पर मढ़ने की असफल कोशिश कर रहा है। परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और नाकामियों का ठीकरा भारत पर फोड़ने की पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान की ओर से इस दावे के पक्ष में कभी कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया, जो यह साबित करता है कि यह केवल एक सोची-समझी साजिश है।

नफरत की फैक्ट्री है पाकिस्तान भारत ने पाकिस्तान को नफरत फैलाने वाली संगठित फैक्ट्री करार दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की व्यवस्था भारत विरोधी माहौल बनाने का इस्तेमाल अपने नागरिकों का ध्यान देश की बदतर आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं से हटाने के लिए करती है। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान में नागरिक संस्थाओं पर सेना के बढ़ते वर्चस्व और हालिया संवैधानिक बदलावों पर भी गंभीर चिंता जताई।

अफगानिस्तान में नरसंहार पर सवाल अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को भारत ने कड़ी फटकार लगाई। भारत ने कहा कि मासूम नागरिकों की हत्या को आतंकवाद विरोधी अभियान नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में हवाई हमले करना और दूसरी तरफ इस्लामी एकता की बात करना पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

बढ़ता मानवीय संकट संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत ने बताया कि फरवरी 2026 में पाकिस्तान के हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 13 नागरिक मारे गए थे। सीमा पर जारी संघर्ष के कारण मार्च 2026 तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है, 104 लोग घायल हुए हैं और 1 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। काबुल के एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए हमले में 400 लोगों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।

भारत ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया को गुमराह करने की पाकिस्तान की ये कोशिशें नाकाम रहेंगी। अपनी विफलताओं के लिए पड़ोसी देशों को जिम्मेदार ठहराना पाकिस्तान की पुरानी आदत है, जो अब वैश्विक स्तर पर बेनकाब हो चुकी है।

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