सेना की बढ़ी पावर : अब कमांडर खुद ले सकेंगे 100 करोड़ तक के बड़े फैसले
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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेनाओं की कार्यकुशलता और ऑपरेशनल तैयारी को नई धार दी है। केंद्र सरकार ने सैन्य कमांडरों और सर्विस चीफ्स की वित्तीय शक्तियों (Financial Powers) में भारी बढ़ोतरी की है। डेलिगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स फॉर डिफेंस सर्विसेज (DFPDS-2026) के तहत अब सेना बिना लंबी फाइलिंग प्रक्रिया के तुरंत निर्णय ले सकेगी।

सर्विस चीफ्स के हाथ में अब ज्यादा अधिकार

नए नियमों के अनुसार, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के प्रमुखों की खर्च करने की सीमा को 75 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 125 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस बदलाव से वे किसी भी महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट के लिए बिना दिल्ली की अतिरिक्त मंजूरी के तेजी से धन आवंटित कर सकेंगे।

कमांडरों की वित्तीय शक्ति में बड़ा उछाल

फिल्ड लेवल पर काम को गति देने के लिए आर्मी कमांडरों और उनके समकक्ष अधिकारियों (नेवी व एयरफोर्स) की वित्तीय पावर को भी तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है। पहले ये अधिकारी अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे सकते थे, जिसे अब बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे बार-बार केंद्रीय स्तर पर अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इमरजेंसी और ऑपरेशनल जरूरतों पर खास फोकस

संकट या अर्जेंट ऑपरेशनल जरूरतों के समय तेजी दिखाने के लिए इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट की सीमा को भी दोगुना कर दिया गया है। इससे भविष्य में किसी भी विपरीत परिस्थिति में सेना तुरंत आधुनिक हथियार और संसाधन जुटाने में सक्षम होगी। साथ ही, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए कंबाइंड खरीद के नए नियम लागू किए गए हैं।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई रफ्तार

सरकार ने स्वदेशी रिसर्च और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों की बजट पावर को दोगुना किया है। जानकारों का मानना है कि इससे डिफेंस स्टार्टअप्स और प्राइवेट कंपनियों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट आसानी से मिलेंगे। इस कदम से विदेशी हथियारों पर भारत की निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को और मजबूती मिलेगी।

क्यों हुई इस बदलाव की जरूरत?

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना का आकार और उसकी जरूरतें काफी बढ़ गई हैं। 2021 के पुराने नियमों में बदलाव समय की मांग थी। यह नई पहल 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रेवेन्यू-संबंधित प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में गेम चेंजर साबित होगी। यह नया सिस्टम अक्टूबर 2025 के डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल के साथ मिलकर काम करेगा।

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