हिंद महासागर में भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर एक दुर्लभ और रणनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब भारत और पाकिस्तान के युद्धपोत एक ही दिन वहां पहुंच गए। इस आमने-सामने की स्थिति ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत का मिशन: नेबरहुड फर्स्ट भारतीय नौसेना का लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस ऐरावत 1 जून को कोलंबो पहुंचा। नौसेना के अनुसार, यह एक नियमित ऑपरेशनल टर्नअराउंड था, जिसका उद्देश्य रसद और ईंधन भरना था। भारत इस यात्रा को अपनी नेबरहुड फर्स्ट और महासागर (MAHASAGAR) नीति का हिस्सा बता रहा है, जो श्रीलंका के साथ मजबूत समुद्री साझेदारी को दर्शाती है।
पाकिस्तान की चीन निर्मित शक्ति प्रदर्शन उसी दिन पाकिस्तान के तीन नौसैनिक जहाज—पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलात और पनडुब्बी पीएनएस/एम हैंगोर—भी कोलंबो पहुंचे। सबसे अधिक चर्चा हैंगोर पनडुब्बी की है। यह चीन द्वारा पाकिस्तान को दी गई नई पीढ़ी की उन्नत पनडुब्बी है, जो बाबर-3 क्रूज मिसाइल दागने में सक्षम है। इसे पाकिस्तान की समुद्री ताकत को बढ़ाने के लिए चीन की एक बड़ी चाल के रूप में देखा जा रहा है।
क्या इसके पीछे चीन की शह है? विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल भारत-पाकिस्तान का आमना-सामना नहीं है। हिंद महासागर में चीन अपना प्रभाव तेजी से फैला रहा है। पाकिस्तान को उन्नत पनडुब्बियां मुहैया कराना और समुद्री गलियारों में मौजूदगी बढ़ाना चीन की उसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह ग्वादर और हंबनटोटा जैसे बंदरगाहों का उपयोग कर रहा है।
श्रीलंका की कठिन कूटनीति श्रीलंका इस समय एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती का सामना कर रहा है। कोलंबो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। श्रीलंका भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को भी प्राथमिकता देता है, लेकिन साथ ही वह चीन और पाकिस्तान के साथ भी संतुलन बनाए रखना चाहता है। दोनों देशों को एक साथ जगह देना श्रीलंका की तटस्थ विदेश नीति का ही एक हिस्सा है।
भारत के लिए क्या हैं संकेत? पाकिस्तान का यह मिशन और उसमें शामिल चीनी तकनीक भारत के लिए चिंता का विषय है। हिंद महासागर में अब केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी को भी काउंटर करना भारत की प्राथमिकता है। 1971 के युद्ध की याद दिलाने वाली हैंगोर और गाजी जैसी पनडुब्बियों के साथ पाकिस्तान का यह आधुनिकीकरण संकेत देता है कि आने वाले समय में हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा समीकरण और भी जटिल होने वाले हैं।
Guided by the timeless ethos of “वसुधैव कुटुम्बकम्” and aligned with Government of India’s vision of #MAHASAGAR and #NeighbourhoodFirst, #INSAiravat arrived in #Colombo on 01 Jun 26 for an operational turnaround.
— SpokespersonNavy (@indiannavy) June 4, 2026
The port call reaffirms the strong maritime partnership between… pic.twitter.com/f0XfDeVPOL
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