गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव: PAK सेना पर लश्कर समर्थित उम्मीदवारों को जिताने और विपक्ष को कुचलने का आरोप
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गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले चुनावों से पहले पाकिस्तान की राजनीति गरमा गई है। पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और सेना पर चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से प्रभावित करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि सेना लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े चेहरों को सत्ता में बैठाकर क्षेत्र में अपनी कठपुतली सरकार बनाना चाहती है।

लश्कर के राजनीतिक मोहरों को बढ़ावा? खुफिया सूत्रों के अनुसार, सेना पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के उम्मीदवारों को खुलकर समर्थन दे रही है। राजनीतिक विश्लेषक इस दल को लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का राजनीतिक मुखौटा मानते हैं। शिया बहुल इस इलाके में कट्टरपंथी संगठनों को आगे बढ़ाकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिशों पर चिंता जताई जा रही है।

विपक्ष का गला घोंटने की कोशिश पीटीआई और टीटीएपी गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें चुनाव प्रचार से ही बाहर कर दिया गया है। कई नेताओं को इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर रोक लिया गया, तो कई को हिरासत में लेकर क्षेत्र से बाहर धकेल दिया गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह सब पूर्व सैन्य शासक जिया-उल-हक की पुरानी डीप स्टेट नीतियों को दोहराने जैसा है।

फिर दोहराया जाएगा फॉर्म-47 का खेल? विपक्ष ने चुनावी धांधली की आशंका जताते हुए फॉर्म-47 मॉडल का जिक्र किया है, जिसका उपयोग 2024 के आम चुनावों में नतीजों में हेरफेर के लिए किया गया था। गड़बड़ मतदाता सूचियों और नकली बैलेट पेपर को लेकर भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि परिणाम पहले ही तय किए जा चुके हैं।

6,000 पंजाब पुलिसकर्मियों की विवादित तैनाती चुनाव सुरक्षा के नाम पर पंजाब से 6,000 पुलिसकर्मियों को गिलगित-बाल्टिस्तान भेजा गया है, जो विवाद की एक और वजह बन गया है। विपक्ष का तर्क है कि ये जवान सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि जनता के जनादेश को चोरी करने के लिए तैनात किए गए हैं। दंगा-रोधी उपकरणों से लैस इन जवानों का मकसद जनता के विरोध को बलपूर्वक कुचलना बताया जा रहा है।

सांप्रदायिक संतुलन और डेमोग्राफिक बदलाव का खतरा विश्लेषकों का मानना है कि पाक सेना सुन्नी इस्लामवादी संगठनों को बढ़ावा देकर गिलगित-बाल्टिस्तान की जनसांख्यिकी (Demography) को बदलने का प्रयास कर रही है। हालांकि, पाक सरकार और सेना इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे संवैधानिक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और जन-आक्रोश सेना की इन दलीलों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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