सीबीएसई (CBSE) की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया एक बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही छात्रों की आंसर शीट्स ने बोर्ड की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि लाखों कॉपियों को प्रोफेशनल स्कैनर्स के बजाय मोबाइल फोन से स्कैन किया गया है।
धुंधली कॉपियां और गायब पेज छात्रों और सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा साझा की गई कॉपियों में कई खामियां देखी गई हैं। कई जगह पेज गायब हैं, उत्तर अस्पष्ट हैं और कॉपियों की गुणवत्ता बेहद खराब है। यूजर्स का कहना है कि अगर ये कॉपियां प्रोफेशनल स्कैनर से स्कैन की गई होतीं, तो इनमें इतनी तकनीकी खामियां नहीं होतीं।
टेंडर की शर्तों को बदलने का आरोप लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। राहुल गांधी का दावा है कि मई 2025 में जारी टेंडर में ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर और 300 DPI रिजॉल्यूशन की शर्त रखी गई थी। हालांकि, अगस्त में जारी किए गए संशोधित टेंडर से ये शर्तें हटा दी गईं, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो गई है।
क्या मोबाइल से हुआ स्कैन? विवाद की जड़ में सेवा प्रदाता कंपनी COEMPT है। राहुल गांधी का आरोप है कि 18.5 लाख छात्रों की कॉपियां महंगे स्कैनर्स के बजाय मोबाइल फोन से स्कैन की गईं। एक यूजर ने ट्वीट कर सीबीएसई से पूछा कि क्या किसी प्रोफेशनल स्कैनर से स्कैन की गई कॉपी में ड्रॉप शैडो और पेपर फोल्ड्स (मोड़) दिख सकते हैं? यह सवाल अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सरकार से जवाबदेही की मांग राहुल गांधी ने इसे महज़ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक बड़ा भ्रष्टाचार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छात्रों के नंबर प्रभावित हुए हैं, वे इस कथित धोखाधड़ी के शिकार हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सीबीएसई की चुप्पी पर सवाल अभी तक सीबीएसई की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। छात्रों का कहना है कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया गया है। अब देखना यह है कि क्या बोर्ड इन गंभीर आरोपों का जवाब देने के लिए कोई स्वतंत्र जांच बिठाता है या नहीं।
@cbseindia29 good morning CBSE, you said you used scanners to scan these copies,
— Sarthak Sidhant (@sidhant_sarthak) May 31, 2026
now since the copies are out to the public view, do you mind explaining
which copies when scanned through a scanner, have a drop shadow? and these 3 folds?
did you really use scanners? pic.twitter.com/GF2I9FiKLh
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