CBSE की बड़ी चूक: पोर्टल में सुरक्षा खामियां उजागर, लाखों छात्रों का डेटा खतरे में!
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर डेटा सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसके सर्विस प्रोवाइडर के OnMark पोर्टल में गंभीर तकनीकी खामियां थीं। इस खुलासे ने लाखों छात्रों की संवेदनशील जानकारी पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं।

छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल मामले की शुरुआत तब हुई जब 12वीं कक्षा के दो छात्रों, निसर्ग अधिकारी और सार्थक सिद्धांत ने बोर्ड की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। निसर्ग ने दावा किया कि क्लाउड स्टोरेज के कॉन्फिगरेशन में ऐसी चूक थी, जिससे बिना किसी वैध ऑथेंटिकेशन के डेटा तक पहुंचा जा सकता था।

वहीं, सार्थक सिद्धांत ने आंसर शीट्स की स्कैनिंग प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन स्कैन की गई कॉपियों की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें ड्रॉप शैडो और कागज पर तीन परतों के निशान थे। छात्रों का तर्क है कि ये निशान सामान्य स्कैनिंग प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकते, जो बोर्ड की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करते हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस छात्रों के इन दावों ने सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलकर एक बड़ी बहस छेड़ दी। लाखों छात्रों और अभिभावकों ने बोर्ड की खामोशी पर नाराजगी जताई और डेटा सुरक्षा को लेकर जवाब मांगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बन गया।

CBSE ने मानी गलती, विशेषज्ञों की टीम तैनात दबाव में आए CBSE ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्वीकार किया कि वह OnMark पोर्टल की खामियों को लेकर जागरूक है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि स्थिति को संभालने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक टीम तैनात की गई है।

बोर्ड का कहना है कि पहचानी गई सुरक्षा खामियों को अब ठीक कर दिया गया है और अन्य संभावित जोखिमों की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही, बोर्ड ने उन जागरूक छात्रों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस सुरक्षा चूक की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया।

छात्रों के लिए राहत: आवेदन की तारीख बढ़ी इस विवाद के बीच बोर्ड ने छात्रों को थोड़ी राहत दी है। डेटा सुरक्षा को लेकर उपजे डर और प्रक्रिया में देरी की संभावनाओं को देखते हुए, बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है।

भविष्य में इस तरह की चूक से बचने के लिए बोर्ड अब डिजिलॉकर के जरिए सीधे आंसर शीट्स उपलब्ध कराने जैसे सुरक्षित विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, यह घटना बोर्ड की डिजिटल प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा गई है।

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