CBSE के OSM टेंडर में धांधली की पोल: 12वीं के छात्र के खुलासे से हिला शिक्षा विभाग
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सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया पर हमेशा से छात्रों की नजर रहती है, लेकिन इस बार एक 12वीं के छात्र ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रांची के छात्र सार्थक सिद्धांत ने अपने एक ब्लॉग के जरिए सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर विसंगतियों का दावा किया है।

टेंडर दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप सार्थक का आरोप है कि सीबीएसई के पुराने और नए टेंडर दस्तावेजों में जानबूझकर बदलाव किए गए हैं। छात्र ने दावा किया है कि बोर्ड ने कोएम्प्ट (Coempt) नामक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में ढील दी है। उल्लेखनीय है कि इस कंपनी का पुराना नाम ग्लोबएरेना रहा है, जो पहले भी कई विवादों में घिरी रह चुकी है।

नई शर्तों से हटाए गए सुरक्षा कवच सार्थक ने अपनी पड़ताल में बताया कि नई आरएफपी (RFP) से खराब प्रदर्शन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण क्लॉज पूरी तरह हटा दिए गए हैं। पहले की शर्तों में उन कंपनियों पर भी रोक थी जो अतीत में कभी ब्लैकलिस्ट हुई थीं, लेकिन अब इसे बदलकर केवल वर्तमान में ब्लैकलिस्ट कंपनियों तक सीमित कर दिया गया है। छात्र का सवाल है कि बोर्ड ऐसी संदिग्ध कंपनियों को काम देने में क्यों दिलचस्पी ले रहा है?

बड़ी कंपनियों को दरकिनार करने का पैटर्न छात्र ने खुलासा किया कि टेंडर की पात्रता शर्तों को इस तरह से बदला गया कि टीसीएस (TCS) जैसी बड़ी और अनुभवी कंपनियों को प्राथमिकता नहीं मिल सकी। इसके विपरीत, पात्रता मानदंडों (जैसे 50 करोड़ की सीमा और भ्रष्टाचार मामलों की समय सीमा) में बदलाव कर कोएम्प्ट के लिए रास्ता साफ किया गया। सार्थक के अनुसार, यह एक सोची-समझी रणनीति लगती है जिससे एक विशेष कंपनी को टेंडर दिलाया जा सके।

उत्तर पुस्तिकाओं की विश्वसनीयता पर सवाल यह विवाद केवल एक टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया, जिसमें करोड़ों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं जांची जाती हैं, यदि वह एक संदिग्ध कंपनी के सॉफ्टवेयर पर निर्भर है, तो परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। छात्रों और अभिभावकों में अब यह चिंता बढ़ गई है कि क्या उनकी कॉपियों का मूल्यांकन सही तरीके से हो रहा है।

फिलहाल, इस सनसनीखेज खुलासे के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। बोर्ड की ओर से अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन छात्र के इस विस्तृत ब्लॉग और दस्तावेजों के विश्लेषण ने सीबीएसई की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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