सम्मान में झुके पजानिवेल, तो उठ खड़े हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रपति भवन में हाल ही में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। जब पुडुचेरी के सिलंबम विशेषज्ञ के. पजानिवेल अपना पद्म श्री सम्मान लेने पहुंचे, तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने साष्टांग प्रणाम किया। इस शिष्टाचार को देखते ही पीएम मोदी तुरंत अपनी सीट से उठ खड़े हुए और पजानिवेल को सहारा देकर ऊपर उठाया। इसके बाद पजानिवेल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के चरण स्पर्श कर गौरवपूर्ण तरीके से अपना सम्मान ग्रहण किया।
कौन हैं के. पजानिवेल? के. पजानिवेल का जन्म 30 जनवरी 1973 को पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में हुआ था। उन्होंने मास्टर राजाराम के सानिध्य में इस प्राचीन मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लिया। पिछले चार दशकों से पजानिवेल न केवल सिलंबम का संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने सैकड़ों छात्रों को निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया है। उन्हें 2023 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार , 2012 में कलाइमामणि पुरस्कार और 2004 में सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
क्या है सिलंबम? सिलंबम तमिलनाडु की एक अत्यंत प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसका इतिहास लगभग 5,000 साल पुराना माना जाता है। यह शब्द सिलम (पहाड़) और बाम (बांस) से मिलकर बना है। इसमें बांस की लचीली लाठी मुख्य हथियार होती है। चोल, चेर और पांड्य राजाओं के काल में इसका उपयोग युद्ध और आत्मरक्षा के लिए किया जाता था। अपनी फुर्ती और घातक तकनीक के कारण अंग्रेजों ने 18वीं सदी के अंत में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि स्वतंत्रता सेनानी इसका इस्तेमाल औपनिवेशिक शासन के खिलाफ कर रहे थे।
भविष्य के लिए पजानिवेल का संकल्प पद्म श्री प्राप्त करने के बाद के. पजानिवेल ने कहा कि यह सम्मान चार दशकों की उनकी मेहनत का फल है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि सिलंबम को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपनी इस समृद्ध विरासत को न भूले। वे अब इस प्राचीन कला को वैश्विक मंच पर और अधिक लोकप्रिय बनाने के अपने मिशन में जुटे हुए हैं।
#WATCH | Silambam exponent K. Pajanivel of Puducherry conferred with the Padma Shri for his contribution in the field of traditional martial arts pic.twitter.com/Sviqc6BPZm
— ANI (@ANI) May 25, 2026
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