व्लादिमीर पुतिन का महाविनाशक वार: ओरेशनिक मिसाइल से दहला कीव, 80 से ज्यादा घायल
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कीव के आसमान में रात के सन्नाटे को चीरते हुए हुए धमाकों ने यूक्रेन की राजधानी को एक बार फिर युद्ध की भयावह तस्वीर में धकेल दिया है। रूस ने एक साथ 90 मिसाइलें और करीब 600 ड्रोन दागकर यूक्रेन पर अब तक का सबसे भीषण हवाई हमला किया है।

हाइपरसोनिक मिसाइल का खौफ इस हमले में रूस ने अपनी सबसे घातक ओरेशनिक (Oreshnik) हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल आवाज की गति से 10 गुना तेज चलने में सक्षम है और परमाणु हथियार ले जाने की ताकत रखती है। इसे रोकना किसी भी रक्षा प्रणाली के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

तबाही का मंजर: 4 की मौत, 80 घायल यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस भीषण हमले के परिणामस्वरूप कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 80 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। रिहायशी इमारतों, स्कूलों और दुकानों के मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। शहर के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने इसे राजधानी के इतिहास की सबसे भयावह रातों में से एक बताया है।

जेलेंस्की का आरोप और रूस का तर्क यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर जानबूझकर आम नागरिकों और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से रूस के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील की है। वहीं, रूस का कहना है कि यह हमला यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र में किए गए ड्रोन हमलों का जवाबी वार है। मास्को ने दावा किया कि उसने केवल सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया है।

मेट्रो स्टेशन बने पनाहगाह हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कीव के नागरिक अपनी जान बचाने के लिए मेट्रो स्टेशनों में दुबकने को मजबूर हुए। सुबह जब सूरज निकला, तो कीव की सड़कों पर धुएं का गुबार और जली हुई इमारतों के अवशेष दिखाई दे रहे थे। घरों की खिड़कियां चकनाचूर हो चुकी थीं और कई जगहों पर आग की लपटें अभी भी उठ रही थीं।

क्या युद्ध अब परमाणु मोड़ पर है? ओरेशनिक मिसाइल का तीसरी बार इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि रूस अब युद्ध में पीछे हटने के मूड में नहीं है। पुतिन की आक्रामक रणनीति और हाइपरसोनिक हथियारों का लगातार बढ़ता इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। अब पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका और नाटो के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे इस बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए कोई नई रणनीति अपनाएंगे।

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