सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नैरेटिव बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम कम हो गए हैं, जबकि भारत में कीमतें आसमान छू रही हैं। इस दावे के जरिए भारत की अर्थव्यवस्था को फेल बताने की कोशिश की जा रही है। लेकिन क्या यह दावा हकीकत की कसौटी पर खरा उतरता है? आइए तथ्यों के जरिए इसे समझते हैं।
तथ्य यह है कि पाकिस्तान में हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में मामूली कटौती हुई है। 23 मई 2026 को वहां पेट्रोल के दाम 409.78 पाकिस्तानी रुपए से घटकर 403.78 रुपए प्रति लीटर हुए हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात जिसे सोशल मीडिया पर छिपाया जा रहा है, वह यह है कि इतनी कटौती के बाद भी कीमतें भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। यह राहत पाकिस्तान की उस अर्थव्यवस्था के सामने बहुत छोटी है, जो पहले ही महंगाई और कर्ज के बोझ से दबी हुई है।
मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच शुरू हुए तनाव के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दाम बेतहाशा बढ़े। दुनिया के अधिकांश देशों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों का बोझ तुरंत अपनी जनता पर डाल दिया।
भारत की स्थिति इससे बिल्कुल अलग रही। मिडिल ईस्ट संकट शुरू होने के बाद करीब 75 दिनों तक भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा। जब अन्य देशों में कीमतों में 20% से 55% तक की उछाल आई, तब भारत में मामूली बढ़ोतरी की गई। आंकड़ों पर गौर करें तो इस दौरान पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में करीब 55% और अमेरिका में 44.5% तक की वृद्धि देखी गई, जबकि भारत में यह बढ़ोतरी काफी नियंत्रित रही।
पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें केवल बाजार के आधार पर तय नहीं होतीं, बल्कि वे अक्सर IMF के दबाव और वहां की गिरती मुद्रा का परिणाम होती हैं। फरवरी 2026 में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 258 रुपए प्रति लीटर थी, जो अप्रैल 2026 तक 458 रुपए तक पहुंच गई थी।
आज अगर वहां मामूली राहत दी गई है, तो वह किसी आर्थिक तरक्की का प्रमाण नहीं, बल्कि जनता के भारी आक्रोश को शांत करने की एक सरकारी मजबूरी है। जिस देश की अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज और डॉलर की कमी से जूझ रही हो, उसे भारत की अर्थव्यवस्था से तुलना करना आर्थिक विश्लेषण नहीं, बल्कि महज एक राजनीतिक एजेंडा है।
सोशल मीडिया पर भारत की तुलना पाकिस्तान से करने वाले लोग जानबूझकर पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। वे यह नहीं बताते कि पाकिस्तान में पेट्रोल 400 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंचा कैसे, और वे यह भी भूल जाते हैं कि भारत ने वैश्विक संकट के बावजूद अपनी जनता को लंबे समय तक महंगाई के बड़े झटके से बचाया है।
तथ्य यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक बाजार पर निर्भर है और अंतरराष्ट्रीय तनावों का असर यहां भी पड़ता है। लेकिन यह निष्कर्ष निकालना कि भारत पिछड़ गया और पाकिस्तान आगे निकल गया , न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि आम नागरिकों को गुमराह करने वाला एक भ्रामक प्रचार भी है।
हाँ तो भगतों क्या हाल चाल है, pic.twitter.com/VXt2fPer9H
— ANIL (@AnilYadavmedia1) May 23, 2026
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