नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा दी है। यह चर्चा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भविष्य के उन बड़े वैश्विक लक्ष्यों को साधने वाली रही, जो दोनों देशों के लिए अहम हैं।
किन मुद्दों पर बनी सहमति? विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देशों ने अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के हर पहलू को खंगाला। इसमें रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने का भी संकल्प लिया गया।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम रक्षा साझेदारी को और मजबूत करते हुए दोनों देशों ने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी रूपरेखा समझौते को नवीनीकृत किया है। साथ ही, अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) के लिए एक व्यापक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के मेक इन इंडिया विजन के साथ रक्षा सहयोग को जोड़ना अब प्राथमिकता है।
पारंपरिक कूटनीति से आगे हैं रिश्ते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध अब पारंपरिक कूटनीति की सीमाओं से कहीं आगे निकल चुके हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच मानवीय संबंध, वीजा नीतियां और हालिया आव्रजन संकट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी स्पष्ट बातचीत हुई है।
व्यापार समझौते पर तेजी वार्ता के दौरान एक अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर भी चर्चा हुई। यह समझौता भविष्य में एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार सौदे की नींव बनेगा। इस विजन की शुरुआत फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान की गई थी, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है।
QUAD की ओर नजरें जयशंकर ने स्पष्ट किया कि अब दोनों नेता मंगलवार को होने वाली QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। इस बैठक में वे ऑस्ट्रेलिया और जापान के अपने समकक्षों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Good discussions with @SecRubio of USA in New Delhi.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) May 24, 2026
Reviewed the entire spectrum of our Comprehensive Global Strategic Partnership, including trade & energy, defence & security, critical minerals & AI, nuclear & people-to-people, counter-terror & counter-narcotics cooperation.… pic.twitter.com/EknpoG4cEl
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