खेतों में कुत्तों से जान बचाकर भागने वाला लड़का बना भारत का सबसे तेज़ धावक
News Image

रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में इतिहास रचते हुए पंजाब के 25 वर्षीय एथलीट गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर की दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। इस उपलब्धि के बाद पूरे देश में गुरिंदरवीर के संघर्ष और उनकी मेहनत की चर्चा है।

कुत्तों ने खोजा था टैलेंट गुरिंदरवीर के कोच सरबजीत सिंह हैप्पी एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हैं। उन्होंने बताया कि गुरिंदरवीर बचपन में खेतों में दौड़ने का अभ्यास करते थे। शुरुआत में उनमें वह जबरदस्त गति तब दिखी, जब उन्हें दौड़ते समय कुछ कुत्तों ने खदेड़ दिया। उस दिन उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए जो रफ्तार पकड़ी, उसी ने उनके भीतर के टैलेंट को पहचान दी।

सुविधाओं के अभाव में लिखी नई कहानी गुरिंदरवीर का सफर आसान नहीं था। जालंधर में उनके पास न तो कोई प्रोफेशनल ट्रैक था और न ही अच्छे जूते। प्रशिक्षण के लिए उन्हें कभी किसी यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते, तो कभी कोच अपनी कार में कंबल बिछाकर उन्हें धर्मशाला ले जाते। कोच हैप्पी के पास 30 एथलीटों की टीम है, लेकिन सीमित साधनों के कारण वे अक्सर आर्थिक चुनौतियों से जूझते रहे हैं।

10 सेकेंड का बैरियर अब दूर नहीं 10.09 सेकेंड के रिकॉर्ड के बाद गुरिंदरवीर का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। उन्होंने कहा, पहले लोग कहते थे कि भारतीयों के जीन्स में 100 मीटर की दौड़ नहीं है, लेकिन हमने इसे गलत साबित कर दिया है। कोच हैप्पी का मानना है कि अगर उन्हें मॉन्डो (Mondo) जैसा विश्वस्तरीय ट्रैक और 1.8 m/s की हवा का साथ मिला होता, तो वे 10 सेकेंड का बैरियर भी तोड़ चुके होते।

अनिमेष के साथ कांटे की टक्कर रिकॉर्ड बनने और टूटने का सिलसिला इस रेस में देखने को मिला। सेमीफाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.17 सेकेंड के साथ रिकॉर्ड तोड़ा, जिसे मात्र 5 मिनट बाद ही अनिमेष कुजूर ने 10.15 सेकेंड में अपना नाम कर लिया। अंततः फाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.09 सेकेंड की टाइमिंग देकर न केवल गोल्ड जीता, बल्कि नेशनल रिकॉर्ड पर भी अपनी पक्की मोहर लगा दी।

गोल्डन जेनेरेशन की दस्तक गुरिंदरवीर अब ब्रिटिश कोच जेम्स हिलियर की देखरेख में मुंबई में आधुनिक ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्हें अच्छी डाइट और जिम की सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे उनके प्रदर्शन में निखार आया है। कोच हैप्पी का मानना है कि मौजूदा एथलीटों की यह पीढ़ी मिल्खा सिंह और मक्खन सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ा रही है और यह भारत की गोल्डन जेनेरेशन साबित होगी।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

जन्नत की चाह में वहशीपन का नंगा नाच: हिंदू महिला का जबरन धर्म परिवर्तन और जानवरों के खून से नहलाने की खौफनाक दास्तान

Story 1

कर्नाटक: नदी में समाई खुशियां, 7 महिलाओं समेत 8 की डूबने से मौत; पीएम मोदी ने जताया दुख

Story 1

खेतों में कुत्तों से जान बचाकर भागने वाला लड़का बना भारत का सबसे तेज़ धावक

Story 1

कुत्तों के पीछे दौड़ने से लेकर नेशनल रिकॉर्ड होल्डर बनने तक: गुरिंदरवीर सिंह की संघर्षपूर्ण कहानी

Story 1

राम चरण से हुई बड़ी चूक, जसप्रीत बुमराह को बताया फुटबॉलर , फिर मांगी माफी

Story 1

46 डिग्री की तपिश: पेड़ से गिरा बेजुबान चमगादड़, वकीलों की दरियादिली से मिली नई जान

Story 1

735 दिनों का लंबा इंतजार खत्म: अर्जुन तेंदुलकर ने मैदान पर दिखाया दम, पिता सचिन हुए भावुक

Story 1

फाल्टा में बीजेपी की आंधी: 15,500 वोटों से आगे, टीएमसी धूल फांकती हुई चौथे नंबर पर

Story 1

नीट पेपर लीक: राहुल गांधी का अल्टीमेटम, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक नहीं रुकेंगे

Story 1

सुनील पाल का समय रैना पर तीखा हमला: बोले- हिम्मत है तो माता-पिता के सामने ये शो करके दिखाओ