भारत सिर्फ पार्टनर नहीं, हमारा सबसे मजबूत पिलर है: दिल्ली पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो
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नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। राजधानी के हैदराबाद हाउस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक ने भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है।

हम सिर्फ सहयोगी नहीं, रणनीतिक साझेदार हैं अपनी पहली भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्ते केवल सामान्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते हमारा सहयोग अविश्वसनीय है। हम सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदार हैं। रूबियो ने उन अटकलों को पूरी तरह खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि ट्रंप प्रशासन के आने के बाद संबंधों को रीसेट करने की जरूरत है। उन्होंने दोटूक कहा कि यह किसी पुरानी साझेदारी को बहाल करने की बात नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद बेहद मजबूत संबंधों को आगे ले जाने का सफर है।

वैश्विक व्यवस्था पर गहरा असर भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि हमारी रणनीतिक साझेदारी का दायरा बहुत व्यापक है। उन्होंने कहा, हमारा सहयोग इतना गहरा है कि इसका सीधा असर वैश्विक व्यवस्था पर पड़ता है। दुनिया के कई हिस्सों में हमारे हित और नजरिए एक समान हैं। जयशंकर ने स्वीकार किया कि मौजूदा दौर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन दो भरोसेमंद साझेदारों के एक साथ आने से समाधान के रास्ते आसान हो जाते हैं।

लंच टेबल पर तय होगी भविष्य की रणनीति दोनों नेताओं के बीच कूटनीतिक तालमेल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद वे वर्किंग लंच पर वापस लौटे। डॉ. जयशंकर ने बताया कि उनकी बातचीत अभी जारी है और लंच के दौरान कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा होगी। उन्होंने यह भी साझा किया कि वे रूबियो के पद संभालने के पहले ही दिन से संपर्क में हैं, जिससे दोनों देशों के बीच अनौपचारिक और मजबूत केमिस्ट्री बनी है।

कूटनीतिक जानकारों का क्या है मानना? जानकारों का मानना है कि रूबियो की यह यात्रा महज औपचारिकता नहीं है। वाशिंगटन, न्यूयॉर्क से लेकर फ्रांस तक पिछली मुलाकातों ने जो आधार तैयार किया था, दिल्ली की यह वार्ता उसे गति दे रही है। माना जा रहा है कि यह रणनीतिक तालमेल न केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता लाएगा, बल्कि वैश्विक पटल पर एक नया संतुलन भी स्थापित करेगा।

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