होर्मुज से ट्रेड तक, अमेरिका के साथ भारत की न्यू डील : जयशंकर-रुबियो बैठक में क्या हुआ तय?
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति के कई महत्वपूर्ण समीकरण साफ कर दिए हैं। दिल्ली में हुई इस बैठक में भारत ने न केवल अपनी विदेश नीति के अहम मुद्दों को रखा, बल्कि वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी पेश किया।

होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री सुरक्षा पर भारत का रुख पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल और गैस से लदे जहाजों की निर्बाध आवाजाही पर जोर दिया है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने का समर्थक है। भारत का यह रुख संकेत देता है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता अनिवार्य है।

ऊर्जा कीमतों में स्थिरता और व्यापारिक समझौता भारत और अमेरिका के बीच केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत ऊर्जा कीमतों में स्थिरता का पक्षधर है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है। दोनों देशों के बीच जल्द ही एक अंतरिम ट्रेड डील को अंतिम रूप देने पर गंभीरता से बात हुई है। साथ ही, ऊर्जा सहयोग, न्यूक्लियर एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए अवसरों पर सहमति बनी है।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और आपसी तालमेल बढ़ते वैश्विक खतरों के बीच, आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को फिर दोहराया। दोनों नेताओं ने माना कि भारत और अमेरिका के सुरक्षा हितों में कई समानताएं हैं। एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए दोनों देशों ने भविष्य में सुरक्षा साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाने का संकल्प लिया।

दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ संबंधों को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका केवल सहयोगी नहीं, बल्कि बहुत गहरे रणनीतिक साझेदार हैं। रुबियो ने लोकतांत्रिक मूल्यों को दोनों देशों के संबंधों की नींव बताया और जोर दिया कि अब लक्ष्य इस रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का है।

क्या है अगला कदम? जयशंकर ने इस मुलाकात को सकारात्मक और परिणाम देने वाली बताया है। रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लगातार मजबूत होते सहयोग के बीच, दोनों देशों ने वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। आने वाले दिनों में ट्रेड डील और तकनीकी सहयोग के मोर्चे पर जल्द ही कोई बड़ी घोषणा देखने को मिल सकती है।

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