बकरीद पर असम के मुसलमानों का ऐतिहासिक फैसला: गो-वध से तौबा कर पेश की भाईचारे की मिसाल
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असम में इस बार की बकरीद (ईद-उल-अजहा) साम्प्रदायिक सौहार्द की एक नई इबारत लिखने जा रही है। राज्य के धुबरी, होजाई, बोंगाईगांव और उधारबंद जैसे प्रमुख क्षेत्रों की ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों ने एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए मुस्लिम समुदाय से बकरीद पर गो-वध न करने की अपील की है। यह फैसला स्वैच्छिक है और इसे सामाजिक एकता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने की सराहना

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी का पत्र साझा करते हुए कहा कि ऐसे कदम राज्य में शांति और भाईचारे को मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री ने अन्य कमेटियों से भी प्रेरित होने और इस ईद को गो-वध मुक्त बनाने का आह्वान किया।

कानून का खौफ या जागरूकता?

धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि असम मवेशी संरक्षण अधिनियम के तहत गो-वध पूरी तरह निषिद्ध है। कानून का उल्लंघन करने पर गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तारी, 3 से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। कमेटियों ने समुदाय को कानूनी जटिलताओं से बचने की भी सख्त हिदायत दी है।

इस्लाम में गो-वध अनिवार्य नहीं

धार्मिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए पत्र में कहा गया है कि इस्लाम में कुर्बानी के लिए गाय का होना बिल्कुल भी अनिवार्य (फर्ज) नहीं है। मुस्लिम समुदाय अन्य वैध जानवरों की कुर्बानी देकर भी अपनी धार्मिक रस्मों को पूरा कर सकता है। कमेटियों का मानना है कि आस्था के नाम पर किसी दूसरे समुदाय की भावनाओं को आहत करना उचित नहीं है।

सोशल मीडिया पर नुमाइश पर पाबंदी

नोटिस में एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया गया है। लोगों से कहा गया है कि वे कुर्बानी के जानवरों, उनके मांस या प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें। मकसद साफ है—किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना, जिससे समाज में नफरत फैले या दूसरे धर्म के लोगों की भावनाएं आहत हों।

दिल्ली में भी प्रशासन सख्त

सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी प्रशासन ने बकरीद को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली में प्रतिबंधित जानवरों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध है। सार्वजनिक स्थानों या रिहायशी इलाकों में कुर्बानी की सख्त मनाही है। केवल सरकार द्वारा अधिकृत स्थानों पर ही नियमों के तहत कुर्बानी की अनुमति होगी।

भाईचारे के नाम पर सतर्कता

पिछले साल कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिशों को याद करते हुए, ईदगाह कमेटियों ने अपने समुदाय से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। कमेटी का मानना है कि देश की विविधता का सम्मान करना और शांति बनाए रखना हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है, जिसे इस बार बकरीद पर पूरी तरह निभाया जाएगा।

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