व्हाइट हाउस के बाहर खूनी खेल: ट्रंप की मीटिंग के दौरान फायरिंग, क्या है ईरान कनेक्शन ?
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वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका की राजधानी में शनिवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया जब व्हाइट हाउस के बाहर गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। जिस समय यह हमला हुआ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अंदर ईरान के साथ संभावित शांति समझौते पर उच्च-स्तरीय बैठक कर रहे थे।

अचानक शुरू हुई अंधाधुंध फायरिंग घटना शाम करीब 6 बजे 17वीं स्ट्रीट और पेन्सिलवेनिया एवेन्यू के पास हुई। सुरक्षा चेकपॉइंट पर तैनात सीक्रेट सर्विस अधिकारियों पर एक युवक ने अचानक बैग से बंदूक निकालकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सीक्रेट सर्विस ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में हमलावर गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस दौरान एक राहगीर के भी घायल होने की खबर है।

हमलावर की पहचान और लॉकडाउन मारे गए हमलावर की पहचान 21 वर्षीय नसीर बेस्ट के रूप में हुई है। फायरिंग शुरू होते ही व्हाइट हाउस को तुरंत लॉक कर दिया गया। मौके पर मौजूद पत्रकारों को सुरक्षा कारणों से प्रेस ब्रीफिंग रूम में शिफ्ट कर दिया गया। नेशनल गार्ड और स्थानीय पुलिस ने पूरे क्षेत्र को सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया है।

ट्रंप का रूख: काम जारी रहेगा व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चुंग ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप सुरक्षित हैं और वे अपना काम जारी रखे हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप की कार्यशैली में इस हमले से कोई रुकावट नहीं आएगी।

क्या है ईरान कनेक्शन की चर्चा? इस हमले के बाद सुरक्षा गलियारों में ईरान से संबंधों की चर्चा तेज हो गई है। पूर्व डिफेंस इंटेलिजेंस अधिकारी एंड्रयू बैजर का कहना है कि ईरान पहले भी ऐसे प्रॉक्सी समूहों या नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है। हालांकि, एफबीआई (FBI) अधिकारियों ने अभी तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि नहीं की है। जांच अभी शुरुआती दौर में है।

एक महीने में दूसरी बड़ी सुरक्षा चूक यह पिछले 30 दिनों में व्हाइट हाउस के पास हुई दूसरी बड़ी घटना है। 25 अप्रैल को भी एक संदिग्ध ने चेकपॉइंट पर फायरिंग की थी, जिसके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे। लगातार हो रही इन वारदातों ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

परमाणु डील और तनाव का माहौल यह हमला तब हुआ है जब ईरान परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी दबाव में है। खबरें हैं कि ईरान ने अमेरिका को 440 किलोग्राम यूरेनियम सौंपने की सहमति दी है। क्या यह हमला इसी डील का कोई विरोध था या कोई सोची-समझी साजिश? फिलहाल एफबीआई की टीम हर पहलू से जांच कर रही है।

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