शांति का मुखौटा या कूटनीतिक चाल? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ ट्रंप शांति समझौते का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस दोहरे रुख ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की तैयारी ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान युद्ध को टालने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) लगभग तैयार है। उनका कहना है कि इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका, ईरान और कुछ अन्य देशों के बीच अंतिम दौर की बातचीत चल रही है और जल्द ही किसी बड़े ऐलान की उम्मीद है।
क्षेत्रीय नेताओं से बनी डील की रूपरेखा इस दावे से पहले ट्रंप ने कतर, सऊदी अरब, यूएई, पाकिस्तान, जॉर्डन, मिस्र, तुर्किए और बहरीन के प्रमुखों से फोन पर बात की। इसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फॉर्मूले में ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कम करना और विदेशी बैंकों में फंसी ईरान की संपत्तियों को जारी करना शामिल है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
विवादित पोस्ट: यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट? शांति वार्ता के बीच ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें ईरान के नक्शे पर अमेरिकी झंडा लगा हुआ था। साथ ही उन्होंने सवाल पूछा- यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट? यानी क्या अमेरिका पूरे मध्य पूर्व पर कब्जा करने की फिराक में है? इस पोस्ट को ईरान के लिए एक सीधी धमकी के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान का तीखा पलटवार ट्रंप के इस पोस्ट पर ईरान ने भी करारा जवाब दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रोमन साम्राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि रोम खुद को दुनिया का केंद्र समझता था, लेकिन ईरान ने उस भ्रम को तोड़ दिया था। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और इतिहास गवाह है कि फारस की शर्तों पर ही समझौते होते हैं।
कूटनीति पर मंडराते सवाल विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह डबल गेम ईरान के कट्टरपंथियों को और मजबूत कर रहा है। जहां एक ओर वार्ता की मेज सजी है, वहीं दूसरी ओर उकसावे वाली बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच का रास्ता अभी भी बेहद कठिन और अनिश्चित है।
First he declared he wanted to eradicate Iran’s civilization now he is declaring that he wants to turn Iran into an American property. It is this kind of grotesque behavior that undermines diplomacy and unites Iranians in defense of their country. In the middle of delicate… pic.twitter.com/YcQl0gYAqi
— Vali Nasr (@vali_nasr) May 23, 2026
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