लौकहा बाजार रेलवे स्टेशन बनेगा हब: वाशिंग पिट और शंटिंग लाइन के लिए टेंडर जारी, बदल जाएगी मिथिलांचल की तस्वीर
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बिहार के मधुबनी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित लौकहा बाजार रेलवे स्टेशन के दिन जल्द ही बदलने वाले हैं। रेलवे ने इस स्टेशन पर ट्रेनों के रख-रखाव के लिए अत्याधुनिक वाशिंग पिट और शंटिंग लाइन के निर्माण हेतु आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है, जिससे क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत होगी।

15 महीने में पूरा होगा निर्माण विभागीय अधिकारियों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया संपन्न होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। रेलवे ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए 15 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उम्मीद है कि साल 2027 के अंत तक लौकहा बाजार स्टेशन पर ट्रेनों के मेंटेनेंस की आधुनिक सुविधाएं पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएंगी।

सीमावर्ती यात्रियों को बड़ी राहत जेडीयू नेता संजय कुमार झा ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह मधुबनी और आसपास के सीमावर्ती जिलों के लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ा तोहफा है। अब तक यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से स्थानीय स्तर पर ही रेल सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

स्थान पर ही होगा ट्रेनों का मेंटेनेंस भारत-नेपाल सीमा के करीब होने के कारण लौकहा बाजार स्टेशन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वाशिंग पिट और शंटिंग लाइन बन जाने से ट्रेनों की धुलाई, सफाई और तकनीकी जांच अब यहीं संभव होगी। वर्तमान में इन सुविधाओं के अभाव में लंबी दूरी की ट्रेनें चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन यह बाधा दूर होते ही रेलवे प्रशासन बड़े शहरों के लिए नई ट्रेनों का परिचालन शुरू कर सकेगा।

रेल मंत्री से मुलाकात के बाद मिली मंजूरी इस परियोजना को धरातल पर लाने में संजय कुमार झा की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने 12 सितंबर 2024 को नई दिल्ली में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की थी। उस बैठक में उन्होंने उत्तर बिहार के रेल नेटवर्क के विस्तार और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने की मांग रखी थी, जिसमें लौकहा बाजार स्टेशन का यह प्रस्ताव भी शामिल था।

मिथिलांचल की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद पूरे मिथिलांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार होगा। ट्रेनों के रख-रखाव की स्थानीय सुविधा मिलने से न केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि इस सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

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