गाजा जा रहे एक्टिविस्टों का दावा: इजरायली हिरासत में मिली शारीरिक प्रताड़ना और टॉर्चर
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गाजा को मानवीय सहायता पहुंचाने के मिशन पर निकले ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला (GSF) के कार्यकर्ताओं ने इजरायली सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 21 मई को तुर्की वापस लौटने पर एक्टिविस्टों ने अपनी हिरासत के दौरान हुए अमानवीय व्यवहार और शारीरिक शोषण का विस्तार से वर्णन किया है।

क्या था यह मिशन? 14 मई, 2026 को दक्षिणी तुर्की के मारमारिस पोर्ट से 50 से अधिक नावें गाजा के लिए रवाना हुई थीं। इस मिशन में दर्जनों देशों के 400 से अधिक लोग शामिल थे, जो प्रतीकात्मक मानवीय सहायता लेकर आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, 18 मई की शाम को इजरायली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इन जहाजों को रोक लिया और सभी लोगों को हिरासत में ले लिया।

हथकड़ी, घसीटना और पिटाई इस्तांबुल पहुंचने के बाद एक्टिविस्टों ने अपने जख्मों और अनुभवों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। एक सहभागी ने आपबीती सुनाते हुए कहा, मेरे हाथ-पैर बांध दिए गए थे। मुझे जमीन पर घसीटा गया और जब मैं चल नहीं पा रहा था, तब भी वे मुझे घसीटते रहे। हथकड़ियां इतनी कस दी गई थीं कि मेरे हाथों में सुन्नता आ गई थी।

मेडिकल सहायता से इनकार का आरोप बेल्जियम के 57 वर्षीय एक्टिविस्ट जूलियन कैब्राल ने बताया कि रेड के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान कैदियों को बेसिक सुविधाएं, जैसे पानी और भोजन मांगने के लिए भी अपमानित किया गया। कई वॉलंटियर्स का दावा है कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें आवश्यक मेडिकल ट्रीटमेंट देने से साफ इनकार कर दिया गया।

सैडिस्टिक व्यवहार और नस्लीय भेदभाव हिरासत से लौटे लोगों ने बताया कि इजरायली सुरक्षा बल उनका मजाक उड़ा रहे थे। जर्नलिस्ट एलेसेंड्रो मंटोवानी ने कहा, हमें जंजीरों में बांधकर ले जाया गया। वे हमें लात-घूंसे मारते हुए इजराइल में स्वागत है कह रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में एक्टिविस्टों की पीठ पर गहरे नीले निशान और चेहरे पर चोटों के साफ प्रमाण दिख रहे हैं। एक कैप्टन ने यह भी दावा किया कि हिरासत में अरबी और गैर-श्वेत लोगों के साथ अन्य कैदियों की तुलना में कहीं अधिक हिंसा की गई।

अधिकार समूहों की कड़ी निंदा यूरोप पैलेस्टाइन नेटवर्क और डॉक्टर्स अगेंस्ट जेनोसाइड जैसे संगठनों ने रिहा किए गए लोगों के शरीर पर मिले चोटों के निशानों को टॉर्चर के सबूत बताया है। फिलहाल, इन आरोपों पर इजरायली अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।

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