ताइवान में चुनावी पोस्टर पर मचा बवाल: पगड़ी और भारतीय झंडे को बनाया निशाना, नस्लवाद के गंभीर आरोप
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ताइवान में भारतीय प्रवासी मजदूरों को लेकर एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। काओशुंग सिटी के एक चुनावी उम्मीदवार ने अपने पोस्टर पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और पगड़ी पहने व्यक्ति की तस्वीर लगाकर उस पर नो का क्रॉस निशान लगा दिया है। इस हरकत को सोशल मीडिया पर खुलेआम नस्लवाद और सांस्कृतिक अपमान के रूप में देखा जा रहा है।

कौन है विवाद का केंद्र? यह पोस्टर काओशुंग सिटी के सियाओगांग डिस्ट्रिक्ट के स्वतंत्र उम्मीदवार ली होंग-यी ने लगवाया है। वे आने वाले सिटी काउंसिल चुनाव के लिए अपना प्रचार कर रहे थे। ली होंग-यी ने तर्क दिया है कि उनका उद्देश्य भारत से मजदूर लाने की ताइवान सरकार की योजना का विरोध करना था। हालांकि, उनकी इस रणनीति की चौतरफा आलोचना हो रही है।

भारतीय समुदाय में गहरी नाराजगी तस्वीर और पोस्टर के सामने आने के बाद ताइवान में रह रहे भारतीय समुदाय ने इसे सीधा नस्लीय हमला करार दिया है। ताइवान में वर्तमान में लगभग 7,000 भारतीय रह रहे हैं, जिनमें से अधिकांश Foxconn और TSMC जैसी बड़ी टेक कंपनियों में कार्यरत हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नीतिगत असहमति अपनी जगह है, लेकिन एक समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान (पगड़ी) को निशाना बनाना अस्वीकार्य है।

स्थानीय राजनीति और बढ़ते सवाल न्यू पावर पार्टी के नेता वांग यी-हेंग ने इस पोस्टर की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि पगड़ी आस्था और सम्मान का प्रतीक है, जिसे राजनीति चमकाने के लिए इस्तेमाल करना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि यह कदम ताइवान की छवि के लिए घातक हो सकता है।

क्या है भारत-ताइवान श्रमिक समझौता? वर्ष 2024 में भारत और ताइवान के बीच प्रवासी श्रमिकों को लेकर एक समझौता (MoU) हुआ था। ताइवान में घटती युवा आबादी और श्रम की कमी को देखते हुए, सरकार भारत से मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और केयरगिविंग क्षेत्रों में मजदूर लाने की तैयारी कर रही है। श्रम मंत्रालय के अनुसार, 2026 तक शुरुआती चरण में लगभग 1,000 भारतीय श्रमिक ताइवान पहुंच सकते हैं।

विपक्षी पार्टी KMT की डराओ राजनीति इस योजना के पीछे सबसे बड़ा राजनीतिक विरोध विपक्षी पार्टी KMT कर रही है। KMT के नेता लगातार भारतीय मजदूरों को लेकर डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के कुछ नेताओं ने भारतीय अपराध आंकड़ों का हवाला देते हुए निराधार दावे किए हैं कि भारतीय मजदूरों के आने से अपराध बढ़ सकते हैं और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

आलोचकों का कहना है कि भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश की तुलना ताइवान से करना तर्कहीन है। इसके बावजूद, नस्लीय टिप्पणियों और भ्रामक आंकड़ों के जरिए भारतीय समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच उभरते संबंधों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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