फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी का रहस्य: क्या आप जानते हैं इस बेशकीमती सोने के कप के 5 अनोखे राज?
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। 19 जून से तीन देशों की मेजबानी में शुरू होने वाले इस महाकुंभ में पूरी दुनिया की नजरें उस सुनहरी ट्रॉफी पर होंगी, जिसके लिए टीमें अपना सब कुछ झोंक देती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ट्रॉफी सिर्फ एक इनाम नहीं, बल्कि अपने आप में एक इतिहास है?

आइए जानते हैं इस बेशकीमती ट्रॉफी से जुड़ी 5 सबसे दिलचस्प बातें।

1. पहली ट्रॉफी क्यों बदलनी पड़ी?

आज जो सोने की चमकती ट्रॉफी हम देखते हैं, वह फीफा की पहली ट्रॉफी नहीं है। शुरुआत में जूलस रिमेट ट्रॉफी का चलन था, जो सोने की परत चढ़ी स्टर्लिंग चांदी से बनी थी। 1970 में जब ब्राजील ने तीसरी बार खिताब जीता, तो नियमानुसार उन्हें वह ट्रॉफी हमेशा के लिए दे दी गई। इसके बाद फीफा ने नई ट्रॉफी बनवाई, जिसे आज हम दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान मानते हैं।

2. कितनी शुद्ध है यह गोल्डन ट्रॉफी?

लोगों को अक्सर लगता है कि यह ट्रॉफी पूरी तरह से ठोस सोने की है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह अंदर से खोखली है और इसका वजन कुल 6.142 किलोग्राम है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें लगभग 5 किलो शुद्ध सोना लगा हुआ है। इसके नीचे का आधार हरे रंग के मेलेशाइट पत्थर से बना है, जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है।

3. करोड़ों में है इसकी कीमत

अपनी सुरक्षा को लेकर चर्चा में रहने वाली इस ट्रॉफी की कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी की मौजूदा बाजार कीमत करीब 5 लाख 50 हजार अमेरिकी डॉलर है। भारतीय मुद्रा में बदलें तो इसकी कीमत लगभग 5 करोड़ 30 लाख रुपये होती है। यही वजह है कि इसे हमेशा कड़ी सुरक्षा और भारी निगरानी में रखा जाता है।

4. ट्रॉफी छूने पर सख्त पाबंदी

इस ट्रॉफी को लेकर अनकहे नियम और परंपराएं हैं। टूर्नामेंट के फाइनल मैच से पहले किसी भी खिलाड़ी को इसे छूने की अनुमति नहीं होती। जीत के बाद सिर्फ विजेता टीम ही इसे उठा सकती है। आम लोगों या खिलाड़ियों के अलावा इसे केवल राष्ट्रप्रमुख ही छू सकते हैं। यहां तक कि इसे लाने-ले जाने वाले अधिकारियों को भी दस्ताने पहनना अनिवार्य होता है।

5. विजेता को मिलती है असली या नकली ट्रॉफी?

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या विजेता टीम असली ट्रॉफी अपने साथ घर ले जाती है? जवाब है- नहीं। जो ट्रॉफी खिलाड़ी मैदान पर उठाते हैं, वह असली होती है, लेकिन उसे जश्न के बाद वापस फीफा को सौंप दिया जाता है। इसके बदले विजेता टीम को उसी के जैसी दिखने वाली एक रेप्लिका (Replica) दी जाती है। असली ट्रॉफी तो स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख स्थित फीफा म्यूजियम में ही सुरक्षित रखी रहती है।

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