क्रूज वेकेशन को अक्सर समंदर के बीच एक सुरक्षित और आलीशान अनुभव माना जाता है। शानदार खाना, मनोरंजन और दुनिया घूमने का लालच लाखों लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन हालिया घटनाओं ने इस चमक-धमक वाली हकीकत के पीछे का एक डरावना चेहरा उजागर किया है। अब क्रूज शिप संक्रामक बीमारियों के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं।
हाल ही में एमवी होंडियस (MV Hondius) जहाज पर हंतावायरस के प्रकोप ने दुनियाभर के एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है। यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें हंतावायरस का एंडीज स्ट्रेन पाया गया, जो इंसानों से इंसानों में फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस क्लस्टर से जुड़े तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जांच में सामने आया कि यह संक्रमण संभवतः जहाज पर चढ़ने से पहले ही शुरू हुआ था, लेकिन जहाज की बंद जगहों ने इसे फैलने का मौका दे दिया।
क्रूज इंडस्ट्री का सबसे तेजी से बढ़ता हिस्सा अंटार्कटिक और एक्सपीडिशन टूरिज्म है। 2015 में यहाँ जाने वाले पर्यटकों की संख्या 37,000 थी, जो 2025 तक 1,17,000 के पार पहुंच गई है। चुनौती यह है कि इन सुदूर इलाकों में मेडिकल सुविधाएं लगभग न के बराबर हैं। यदि कोई गंभीर संक्रमण फैलता है, तो इमरजेंसी इवैक्यूएशन (निकासी) करना नामुमकिन जैसा हो जाता है।
भले ही हंतावायरस जानलेवा है, लेकिन नोरोवायरस क्रूज पर सबसे ज्यादा तबाही मचाता है। इसे क्रूज शिप वायरस भी कहा जाता है। हाल ही में कैरिबियन प्रिंसेस जहाज पर 100 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ गए। सीडीसी (CDC) के डेटा के मुताबिक, पिछले साल 18 अलग-अलग आउटब्रेक्स में 2,200 से ज्यादा लोग इस वायरस का शिकार हुए। यह वायरस सतहों पर कई दिनों तक जिंदा रह सकता है, जिससे बार-बार सफाई के बावजूद इसे रोकना मुश्किल होता है।
एक्सपर्ट्स क्रूज शिप को सेमी-एनक्लोज्ड इकोसिस्टम कहते हैं। आधुनिक मेगा-क्रूज जहाजों पर 6,000 से अधिक यात्री और 2,000 क्रू मेंबर्स 24 घंटे एक साथ रहते हैं। लिफ्ट, डाइनिंग हॉल, थिएटर और कसीनो का साझा इस्तेमाल संक्रमण फैलने का मुख्य कारण है। जहाज का बफे सिस्टम और कॉमन ड्रिंक स्टेशन भी वायरस के प्रसार में सुपर-स्प्रेडर की भूमिका निभाते हैं।
कोरोना महामारी के बाद क्रूज ऑपरेटरों ने एयर फिल्ट्रेशन और मेडिकल प्रोटोकॉल में सुधार किए हैं, लेकिन जहाज की बुनियादी संरचना को बदलना एक बड़ी चुनौती है। जहाजों का टर्नओवर टाइम —यानी एक यात्रा खत्म होने और दूसरी शुरू होने के बीच का 6 से 10 घंटे का समय—गहन सफाई के लिए बेहद कम होता है।
यात्रियों के लिए सलाह: क्रूज इंडस्ट्री केवल मुनाफे पर ध्यान नहीं दे सकती। यात्रियों को भी जागरूक रहना होगा। बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर का उपयोग और सही समय पर वैक्सीनेशन ही फिलहाल सबसे बड़े बचाव हैं। यदि आप सुदूर या चुनौतीपूर्ण इलाकों की यात्रा पर जा रहे हैं, तो अपनी मेडिकल तैयारियों को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहें। यह लग्जरी सफर जितना आरामदायक है, उतनी ही जिम्मेदारी भी मांगता है।
सौ बात की एक बात
— News18 India (@News18India) May 8, 2026
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