लेनिन की मूर्ति पर हमला: बंगाल की राजनीति में लाल सलाम और वर्चस्व की जंग
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पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद फैली हिंसा ने एक बार फिर वैचारिक टकराव को हवा दे दी है। मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में व्लादिमीर लेनिन की प्रतिमा को तोड़े जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से राज्य में राजनीतिक पारा गरमा गया है।

सीपीआई (एम) का बड़ा आरोप सीपीआई (एम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि 5 मई की रात भाजपा समर्थकों ने लेनिन की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया। पार्टी का आरोप है कि यह भाजपा की अराजकता का प्रमाण है। मामले में तुरंत पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई और विरोध प्रदर्शन के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सीपीआई (एम) ने घोषणा की है कि 8 मई को प्रतिमा को पुनः स्थापित किया जाएगा।

कौन थे व्लादिमीर लेनिन? 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारी विचारकों में शुमार व्लादिमीर लेनिन का जन्म 1870 में रूस के सिम्बिर्स्क में हुआ था। कानून की पढ़ाई करने वाले लेनिन के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब उनके बड़े भाई को सरकार विरोधी साजिश के आरोप में फांसी दी गई। इस घटना ने उन्हें राजनीति की ओर मोड़ दिया।

1917 की रूसी क्रांति और भारत से नाता 1917 में लेनिन के नेतृत्व में रूस में बोल्शेविक क्रांति हुई, जिसने जार (सम्राट) के शासन को उखाड़ फेंका और सोवियत संघ (USSR) की नींव रखी। लेनिन के विचार केवल रूस तक सीमित नहीं रहे; उन्होंने कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के जरिए दुनिया भर के आंदोलनों को प्रेरित किया। भारत में कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना भी उन्हीं के वैचारिक समर्थन और प्रेरणा से हुई थी।

इतिहास के पन्नों में लेनिन लेनिन का जीवन संघर्षों भरा रहा। 1918 में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें वे घायल हो गए। साल 1922 में स्ट्रोक के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और 24 जनवरी 1924 को उनका निधन हो गया। आज भी उनका संरक्षित शव मॉस्को के रेड स्क्वायर स्थित मकबरे में रखा गया है।

बंगाल में सियासत का हिंसक मोड़ पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही चुनावी हिंसा के कई मामले सामने आ रहे हैं। कोलकाता से लेकर राज्य के अन्य शहरों तक टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें चिंताजनक हैं। चुनाव आयोग ने भी इस हिंसा पर संज्ञान लेते हुए अपनी चिंता जाहिर की है। ऐसे में लेनिन की प्रतिमा का अपमान केवल पत्थर तोड़ने की घटना नहीं, बल्कि राज्य के ध्रुवीकृत राजनीतिक माहौल का एक हिंसक प्रतिबिंब है।

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