अमेरिका-ईरान युद्ध का चौंकाने वाला अंत: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी खत्म, शांति की ओर ट्रंप का कदम
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वाशिंगटन: दुनिया के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। महीनों से जारी अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध का दौर आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अब खत्म हो चुका है।

रुबियो ने कहा- लक्ष्य पूरा हुआ व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और उसके सहयोगी अब इस सैन्य अभियान को आगे नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत जो रणनीतिक उद्देश्य अमेरिका ने तय किए थे, उन्हें हासिल कर लिया गया है। अब हम इस चरण को समाप्त कर रहे हैं।

रुबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिका किसी भी नए संघर्ष की स्थिति नहीं चाहता। प्रशासन का मानना है कि अब शांति स्थापित करने का समय आ गया है और आगे की बातचीत कूटनीतिक रास्तों से की जाएगी।

ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान के लोग अच्छे हैं ऑपरेशन की समाप्ति के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त संदेश साझा किया। उन्होंने कहा, ईरान के लोग बहुत अच्छे हैं। मैं उन्हें नहीं मारना चाहता। ट्रंप का यह रुख युद्ध के बाद के कूटनीतिक सुधारों की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

28 फरवरी को शुरू हुआ था संघर्ष बता दें कि यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की सत्ता को कमजोर करना था। इसी ऑपरेशन के दौरान, अमेरिका और इजराइल के संयुक्त प्रयासों से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक उथल-पुथल मच गई थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता युद्ध के दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था। यह क्षेत्र दुनिया के लिए तेल और गैस की सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। इसकी नाकेबंदी से वैश्विक बाजार में हाहाकार मच गया था। कच्चे तेल की कीमतें 1130 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थीं, जो वर्तमान में 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।

नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा रुबियो ने चिंता जताते हुए बताया कि इस तनावपूर्ण क्षेत्र में अभी भी करीब 23 हजार नाविक फंसे हुए हैं जिनकी स्थिति काफी नाजुक है। अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया कि जलमार्ग को अवरुद्ध करके उसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि युद्ध समाप्त होने के बाद क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात फिर से सामान्य हो पाएगा।

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