नाइजीरिया का फर्टिलिटी फेस्टिवल बना दरिंदगी का अखाड़ा: सड़क पर महिलाओं को दौड़ा-दौड़ा कर किया प्रताड़ित
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नाइजीरिया के डेल्टा राज्य से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। ओरामुडू समुदाय में मनाए जाने वाले पारंपरिक अलुए-डो (Alue-Do) फेस्टिवल के दौरान भीड़ ने महिलाओं को निशाना बनाया। इस घटना को लेकर दुनिया भर में आक्रोश है।

क्या है अलुए-डो का काला सच? आरोप है कि फेस्टिवल के नाम पर पुरुषों और नाबालिग लड़कों की भीड़ ने सार्वजनिक सड़कों पर महिलाओं को दौड़ाया और उनके कपड़े फाड़ दिए। भीड़ ने महिलाओं के साथ सरेआम यौन उत्पीड़न किया। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इसे रेप फेस्टिवल तक कहा जा रहा है, क्योंकि भीड़ ने हिंसा को एक उत्सव की तरह अंजाम दिया।

पीड़िता की आपबीती: मदद के लिए चिल्लाती रही, लोग देखते रहे एक पीड़िता, जो स्थानीय विश्वविद्यालय की छात्रा बताई जा रही है, ने अपना दर्द बयां किया। उसने बताया कि जैसे ही भीड़ ने उसे देखा, वे चिल्लाने लगे, उसे पकड़ो, वह महिला है। भीड़ ने उसे घेर लिया, कपड़े फाड़ दिए और शारीरिक प्रताड़ना दी। उस दौरान तमाशबीन भीड़ मदद करने के बजाय तमाशा देखती रही। एक राहगीर की मदद से किसी तरह वह अपनी जान बचाकर निकल पाई।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां मामले की गंभीरता को देखते हुए डेल्टा स्टेट पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस प्रवक्ता ब्राइट एडाफे ने पुष्टि की है कि एक स्थानीय सामुदायिक नेता समेत कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस कमिश्नर ने मामले को स्टेट क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) को सौंपने के निर्देश दिए हैं ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।

संस्कृति की आड़ में अपराध पर सवाल मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। महिला अधिकार अधिवक्ता रीटा आइकी का कहना है कि किसी भी संस्कृति या परंपरा को महिलाओं के अपमान का लाइसेंस नहीं बनाया जा सकता। समाज में इस तरह की भीड़ द्वारा की गई हिंसा एक खतरनाक मानसिकता को दर्शाती है।

इंटरनेशनल लेवल पर फूटा लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखकर दुनिया भर में लोग दंग हैं। यूजर्स का कहना है कि 21वीं सदी में भी इस तरह की बर्बरता का होना सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल सके।

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