जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर स्थित बगलिहार बांध इन दिनों कूटनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने का एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन बांध के सभी गेट अभी भी बंद हैं। यह कदम पाकिस्तान पर बढ़ते कूटनीतिक दबाव का स्पष्ट संकेत है।
अटल फैसला, सख्त रुख पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि के निलंबन का कड़ा फैसला लिया था। इस निर्णय के तहत, चिनाब नदी पर बने बगलिहार डैम के मुख्य गेटों को बंद कर पानी के बहाव को नियंत्रित किया गया। एक साल बीत जाने के बाद भी भारत का रुख अब भी बेहद सख्त है और इस ऐतिहासिक जल-बंटवारा समझौते को ठंडे बस्ते में रखा गया है।
भारी बारिश ने दी मजबूरी, फिर आई सख्ती हाल ही में रामबन और आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे चिनाब नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया। बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए प्रबंधन को कुछ समय के लिए गेट खोलने पड़े थे। हालांकि, स्थिति सामान्य होते ही गेट फिर से बंद कर दिए गए, जो यह दर्शाता है कि भारत की निगरानी अब भी पहले जैसी ही है।
क्या है सिंधु जल संधि? 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई इस संधि के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों का बंटवारा किया गया था।
भारत का जल प्रबंधन संधि के तहत मिलने वाले अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए भारत ने भाखड़ा बांध, पोंग बांध और रणजीत सागर बांध जैसी विशाल परियोजनाएं विकसित की हैं। इंदिरा गांधी नहर जैसी प्रणालियों के माध्यम से भारत अपने आवंटित जल का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित कर रहा है।
बगलिहार डैम पर जारी यह सख्ती केवल एक तकनीकी कार्रवाई नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए भारत का एक कड़ा कूटनीतिक संदेश है। जल प्रबंधन के जरिए क्षेत्र में भारत की स्थिति अब पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली और रक्षात्मक है।
*#WATCH | Ramban, Jammu and Kashmir: Visuals from Ramban s Baglihar Dam on the Chenab River, where all gates of the dam are closed.
— ANI (@ANI) May 3, 2026
The gates were opened when the water levels in the Chenab River rose following heavy rainfall in the region.
After the Pahalgam attack, the Indus… pic.twitter.com/m1jSJgZD3I
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