ट्रंप की दो टूक: ईरान का नया प्रस्ताव खारिज, सैन्य टकराव पर अमेरिका का रुख सख्त
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ईरान ने अमेरिका के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के जरिए अपना नया प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि वे ईरान के वर्तमान प्रस्तावों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और अमेरिका इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई समझौता करके पीछे हटने को तैयार नहीं है।

ट्रंप की रणनीति: बातचीत जारी, लेकिन समझौते की जल्दी नहीं

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान समझौता करने के लिए बेताब है, लेकिन उनके द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव संतोषजनक नहीं हैं। उन्होंने कहा, हम बातचीत के लिए प्रयास कर रहे हैं और फोन पर संपर्क भी हो रहा है, लेकिन मैं किसी भी ठोस नतीजे को लेकर आश्वस्त नहीं हूं। ट्रंप ने जोर देते हुए कहा कि सनकी लोगों को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, इसलिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना एक अनिवार्य कदम था।

युद्ध के आंकड़े और पेंटागन पर ईरान का हमला

तनाव के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। पेंटागन ने कांग्रेस को बताया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का 25 अरब डॉलर का खर्च हुआ है। वहीं, अराग़ची का दावा है कि नेतन्याहू के इस जुए के कारण अमेरिका को वास्तव में 100 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जिसका भारी बोझ अमेरिकी करदाताओं पर पड़ रहा है।

कांग्रेस को ट्रंप का संदेश: सैन्य अभियान समाप्त

ट्रंप ने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन और सीनेट को पत्र लिखकर सूचित किया है कि 7 अप्रैल, 2026 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है। उन्होंने घोषित किया है कि 28 फरवरी से शुरू हुई शत्रुता समाप्त हो चुकी है। ट्रंप का तर्क है कि तनाव कम होने के कारण उन्हें अब सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी की जरूरत नहीं है।

होर्मुज़ स्ट्रेट पर संकट और हथियारों की बिक्री

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी कंपनी होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरान को टोल देगी, उस पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इस समुद्री मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। इस बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों—इजराइल, कतर, कुवैत और यूएई—के लिए 8.6 अरब डॉलर के बड़े हथियार सौदों को मंजूरी दी है, जिससे क्षेत्र में सैन्य संतुलन बनाए रखने का संकेत मिलता है।

आर्थिक मोर्चे पर ईरान की चुनौती

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने जनता से आर्थिक मुक़ाबला करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सैन्य टकराव में ताकत दिखाने के बाद अब ईरान को आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चों पर भी दुश्मनों को हराना होगा। उन्होंने ईरान के कारोबारियों से अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकालने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।

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