ईरान में हुआ तख्तापलट : क्या बंदूक के साये में सिमट गई राष्ट्रपति की शक्ति?
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ईरान में चल रहे युद्ध के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की सत्ता अब पूरी तरह से उसकी इलीट फोर्स रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के नियंत्रण में आ चुकी है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान केवल नाम मात्र के प्रमुख बनकर रह गए हैं, जबकि असली फैसले अब IRGC के नए चीफ जनरल अहमद वहीदी ले रहे हैं।

नियुक्तियों पर वहीदी का वीटो

ईरान के सिस्टम में बदलाव का आलम यह है कि राष्ट्रपति द्वारा की जा रही नियुक्तियों को IRGC चीफ ने सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। हाल ही में, मसूद पेजेशकियान द्वारा प्रस्तावित इंटेलिजेंस मिनिस्टर के सभी उम्मीदवारों को जनरल वहीदी ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि युद्धकाल में कोई भी महत्वपूर्ण नियुक्ति अब IRGC की सहमति के बिना नहीं होगी। यह घटना पुष्टि करती है कि ईरान में अब नेताओं के फैसलों से ऊपर फौजी बूटों की आवाज है।

सुप्रीम लीडर भी हुए हाशिए पर

इस सत्ता परिवर्तन का असर ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व तक देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा का हवाला देते हुए IRGC ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की वरिष्ठ नेताओं के साथ होने वाली मुलाकातों पर पाबंदी लगा दी है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब मोजतबा भी केवल एक नाम के सुप्रीम लीडर बनकर रह गए हैं, जबकि पावर सेंटर पूरी तरह से सैन्य कमांडरों के हाथ में है।

होर्मुज में अराजकता का संदेश

IRGC की मनमानी का पहला बड़ा संकेत 18 अप्रैल को दिखा, जब विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची के होर्मुज मार्ग खोलने के दावे के बावजूद, IRGC की नौसेना ने भारतीय जहाजों पर गोलियां चला दीं। हमला करने से पहले रेडियो संदेश में कमांडरों ने साफ कहा कि वे किसी नेता के बयानों को नहीं मानते। यह साफ तौर पर सरकार को दरकिनार कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश थी।

IRGC: एक सेना या बिजनेस साम्राज्य?

विशेषज्ञों के अनुसार, IRGC का युद्ध को खींचने के पीछे का कारण केवल राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि आर्थिक हित हैं। ईरान की जीडीपी के करीब 50 फीसदी हिस्से पर IRGC का कब्जा है। इंजीनियरिंग यूनिट अंबिया के जरिए सड़क, रेल और बांध जैसे बड़े ठेकों पर इनका एकाधिकार है। इसके अलावा, तस्करी के नेटवर्क से ये हर साल लाखों करोड़ रुपये कमाते हैं। यदि अमेरिका के साथ युद्धविराम होता है और समझौते की शर्तें लागू होती हैं, तो IRGC का यह डर्टी मनी का साम्राज्य खतरे में पड़ जाएगा।

क्या ईरान बनेगा अगला पाकिस्तान ?

डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान में हो रहे इस सत्ता परिवर्तन को भांप लिया है। ट्रंप ने अपने हालिया बयान में संकेत दिया कि ईरान में सत्ता का स्वरूप बदल चुका है, जिसकी वजह से अब बातचीत के समीकरण बदल गए हैं। यदि IRGC इसी तरह हावी रही, तो ईरान का भविष्य पाकिस्तान की तरह हो सकता है, जहाँ सेना सरकार का फैसला करती है और जब चाहे सत्ता को कुचलकर अपना तानाशाह नियुक्त कर देती है। साफ है कि ईरान अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ शांति का रास्ता IRGC की सनक पर टिका है।

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