खरगे के आतंकी वाले बयान पर सियासी घमासान: चुनाव आयोग पहुंचे रिजिजू, सख्त कार्रवाई की मांग
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई एक विवादास्पद टिप्पणी ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। खरगे के बयान को घोर अपमानजनक बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनावी बिगुल के बीच मोर्चा खोल दिया है।

बीजेपी का चुनाव आयोग के द्वार केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के नेतृत्व में बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा है। पार्टी ने अपनी औपचारिक शिकायत में कहा है कि तमिलनाडु में आदर्श आचार संहिता लागू है और ऐसे समय में देश के प्रधानमंत्री पर इस तरह की टिप्पणी चुनावी माहौल को विषाक्त करती है।

क्या है बीजेपी की कानूनी दलील? बीजेपी ने शिकायत में इसे निजी बदनामी और लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है। पार्टी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं, जैसे कि धारा 175, 171/174 (अनुचित प्रभाव) और 356(1) (मानहानि) के तहत कार्रवाई की मांग की है। बीजेपी ने आयोग से स्पष्ट तौर पर बयान वापस लेने, माफी मांगने और खरगे पर चुनावी प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

गृह मंत्री अमित शाह का तीखा प्रहार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी सार्वजनिक चर्चा के स्तर को लगातार गिरा रही है। शाह ने कहा, मोदी जी जैसे नेता को, जिन्होंने पिछले 12 वर्षों में आतंकवाद का खात्मा किया है, उन्हें आतंकवादी कहना निंदनीय है। यह देश के सर्वोच्च नेता और जनता का अपमान है।

विवाद का केंद्र: क्या बोले थे खरगे? यह पूरा विवाद खरगे द्वारा तमिलनाडु में एआईएडीएमके (AIADMK) और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल उठाने के दौरान शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए आतंकवादी जैसा शब्द इस्तेमाल किया, जिसे बीजेपी ने तुरंत मुद्दा बना लिया।

खरगे की सफाई: मेरा मतलब डराने-धमकाने से था बढ़ते दबाव के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने सफाई पेश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा। खरगे ने कहा, मेरा मतलब यह था कि मोदी लोगों और राजनीतिक पार्टियों को ED, CBI और इनकम टैक्स जैसी संस्थाओं के जरिए डरा-धमका रहे हैं। वह आतंकित करने वाली राजनीति कर रहे हैं।

आगे क्या? फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बनाकर कांग्रेस को अर्बन नक्सल विचारधारा से जोड़कर घेर रही है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आयोग इस मामले में क्या संज्ञान लेता है।

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