अमेरिका-ईरान तनाव: तौस्का जहाज का काला सच और समुद्र में छिड़ी जंग
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ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी मालवाहक जहाज तौस्का को पकड़े जाने के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद से पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।

क्या है विशालकाय तौस्का जहाज का इतिहास?

तौस्का कोई आम नाव नहीं, बल्कि 2007 में दक्षिण कोरिया में बना 294 मीटर लंबा पनामाक्स-क्लास कंटेनर जहाज है। इसमें 5,000 स्टैंडर्ड शिपिंग कंटेनर ले जाने की क्षमता है। यह जहाज मलेशिया के पोर्ट कलांग से ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर जा रहा था, तभी अमेरिकी घेराबंदी ने इसका रास्ता रोक लिया।

क्यों अमेरिका ने इसे बनाया निशाना ?

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि तौस्का लंबे समय से अवैध गतिविधियों में लिप्त है। यह जहाज अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की ब्लैकलिस्ट में शामिल है। पश्चिमी देशों का दावा है कि इसका संचालन इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स करती है, जो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम के लिए सामान की ढुलाई करता है। रिपोर्टों के अनुसार, इस पर रॉकेट ईंधन में इस्तेमाल होने वाले संवेदनशील रसायनों की तस्करी का भी आरोप है।

फिल्म जैसा ऑपरेशन: इंजन रूम को बनाया निशाना

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के फुटेज में पूरी कार्रवाई की पुष्टि होती है। अमेरिकी नौसैनिकों ने रेडियो पर चेतावनी दी कि जहाज का इंजन रूम खाली कर दिया जाए। जब चेतावनी अनसुनी कर दी गई, तो यूएसएस स्प्रुआंस युद्धपोत ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर जहाज के इंजन रूम में बड़ा छेद कर दिया। छह घंटे की भारी मशक्कत के बाद अमेरिका ने जहाज को अपंग बनाकर उस पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया।

ईरान का पलटवार और चीन की चिंता

इस घटना को तेहरान ने समुद्री डकैती करार दिया है। ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका ने युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। घाना स्थित ईरानी दूतावास ने चेतावनी दी है कि यह हरकत अमेरिका को बहुत महंगी पड़ेगी। वहीं, चीन ने भी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। बीजिंग का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही बेहद संवेदनशील है, ऐसे में किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से तनाव और बढ़ सकता है।

क्या है अमेरिका का तर्क?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों को दरकिनार किया। वाशिंगटन के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करने और अवैध तस्करी को रोकने के लिए जरूरी थी। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान की जवाबी धमकी हकीकत में क्या रूप लेगी।

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